ग्रीन कार्डधारी गरीबों का मारा जा रहा हक, राशन का चावल मिलने में हो रही देरी, फरवरी का खाना सितंबर में नसीब

झारखंड के ग्रीन कार्डधारी गरीब परिवार के लोग सरकारी अनाज नहीं मिल मिलने से परेशान हैं। राज्‍य में करीब 485806 लोग ऐसे हैं जो आठ महीने से राशन न मिलने की वजह से परेशान है। गरीब जनवितरण प्रणाली के दुकानों का चक्कर लगा लगाकर परेशान हो गए हैं। आपूर्ति विभाग के पूरे सिस्‍टम में लूट मची है जिसका खमियाजा गरीब भुगत रहे हैं।
झारखंड सरकार की महत्वाकांक्षी ग्रीन कार्ड राशन योजना पूरी तरह से बेकार हो चुकी है। आठ माह से गरीब चावल के इंतजार में हैं। वर्तमान में राज्य में गरीबों को फरवरी माह का राशन मिल रहा है।

सरकारी अनाज नहीं मिलने से परेशान लोग
राज्य के 485806 ग्रीन कार्डधारी गरीब परिवार के लोग सरकारी अनाज नहीं मिल मिलने से परेशान हैं। आठ महीने से उन्हें सरकारी अनाज नहीं मिल रहा।जनवितरण प्रणाली के दुकानों का चक्कर लगा लगाकर परेशान हैं, लेकिन हर बार दुकानदारों से एक ही जवाब मिल रहा।

एफसीआई गोदाम से ग्रीन राशन कार्ड धारकों के लिए अनाज ही नहीं मिल रहा है। राज्य सरकार आवंटन नहीं दे रही है। इसके बाद वह हार कर घर लौट जा रहे हैं।

आपूर्ति विभाग के पूरे सिस्‍टम में मची लूट
करमा पूजा में उन्हें आशा थी कि उन्हें जरूर राशन मिल जाएगा। ग्रीन राशन कार्डधारियों को प्रत्येक सदस्य पांच किलो चावल ही मिलता है। वह भी बोकारो के आपूर्ति विभाग के पूरे सिस्टम में लूट मचा हुआ है। सबके सब गरीब का चावल लूटने में बेचैन हैं।
राशन खा जा रहे दुकानदार
पूरे राज्य में 50 प्रतिशत से अधिक ग्रीन कार्डधारकों को अनाज मिल चुका है। पर बोकारो के डीलर आम लोगों को भगा दे रहे हैं। अब तक पूरे जिले में मात्र 25.26 प्रतिशत लोगों को ही फरवरी माह का अनाज मिला है।

जबकि पड़ोस के जिले रामगढ़ में 88.05 प्रतिशत लोगों को फरवरी माह का राशन मिल चुका है। दुकानदार इस फिराक में हैं कि अक्टूबर माह में जब मार्च का आवंटन मिल जाएगा तो एक माह का राशन देकर दूसरे माह का राशन खा जाएंगे।

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