*12 दिसंबर को राजभवन घेराव: आदिवासी अस्मिता की रक्षा के लिए बड़ा प्रदर्शन — केंद्रीय सरना समिति*

*12 दिसंबर को राजभवन घेराव: आदिवासी अस्मिता की रक्षा के लिए बड़ा प्रदर्शन — केंद्रीय सरना समिति

 

*रांची।* राज्य की राजधानी रांची में 12 दिसंबर को होने वाला राजभवन घेराव और ऐतिहासिक धरना अब झारखंड भर में चर्चा का प्रमुख विषय बन गया है। केंद्रीय सरना समिति द्वारा आयोजित यह आंदोलन आदिवासी अस्मिता, संस्कृति और सारना धर्म की संवैधानिक मान्यता को लेकर किया जा रहा है।

 

केंद्रीय सरना समिति की महिला अध्यक्ष निशा भगत ने कहा कि आदिवासी समुदाय की संस्कृति और परंपराओं पर बाहरी दबाव बढ़ रहा है, जिसके खिलाफ व्यापक जनएकजुटता आवश्यक है। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ संस्थाओं और समूहों के माध्यम से आदिवासी समाज में फूट डालने की कोशिशें की जा रही हैं, जिसका प्रतिकार अब निर्णायक चरण में होगा।

 

निशा भगत के अनुसार, इस आंदोलन का मुख्य लक्ष्य है कि

“आदिवासी समुदाय को ईसाई धर्म से डीलिस्ट किया जाए और सारना धर्म को संवैधानिक मान्यता प्रदान की जाए।”

 

उन्होंने दावा किया कि 12 दिसंबर को पूरे झारखंड से हजारों समर्थक रांची पहुंचकर राजभवन घेराव में भाग लेंगे।

 

कार्यक्रम में फूलचंद तिर्की, निशा भगत और अन्य जनजातीय नेताओं की उपस्थिति की पुष्टि हुई है। आयोजकों का कहना है कि यह धरना आदिवासी पहचान, परंपरा और धार्मिक स्वतंत्रता से जुड़े मुद्दों को सरकार के समक्ष मजबूती से उठाने का प्रयास है।

 

राज्य के विभिन्न जिलों में इस आंदोलन को लेकर उत्साह देखा जा रहा है। आयोजन समिति का कहना है कि राजभवन परिसर में 12 दिसंबर को आदिवासी अस्मिता की गूंज सुनाई देगी और सरकार के सामने समुदाय की एकजुट आवाज पहुंचेगी।

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