प्रेस विज्ञप्ति:सत्यानंद योग केंद्र के तत्वाधान में आज से गुजराती सनातन समाज में साप्ताहिक योग शिविर का शुरुआत दीप प्रज्वलित कर स्वामी गोरखनाथ एवं श्रीमान रश्मि ठक्कर के द्वारा किया गया। शिविर बिहार स्कूल ऑफ योग के वरिष्ठ सन्यासी गोरखनाथ जी के मार्गदर्शन में किया जा रहा है। आज जिसमें मुख्यतः ताड़ासन, त्रियक ताड़ासन,कटी चक्रासन चक्की चलन, नौवका संचालन, शशांक आसन, उष्ट्रासन, मर्जरी आसन, अभ्यास करवाया गया। स्वामी जी ने बताया कि ऊर्जा का संवहन का मुख्य रास्ता रीड की हड्डी से होकर जाता है ऊर्जा जो प्राण के रूप में हमारे शरीर में प्रवाहित होता है, हमें हमेशा रीड की हड्डी को स्वस्थ रखना चाहिए और रीड की हड्डी को स्वस्थ रखने के लिए उपरोक्त सभी आसनों का नियमबद्ध तरीके से, अपने क्षमता, जरूर, बीमारी आदि को ध्यान में रखते हुए सही तरीके से अभ्यास करना चाहिए। हमारा रीड का हड्डी जितना स्वस्थ होगा हमारा शरीर उतना मस्त होगा, हम उतना मस्त होंगे।अंत में स्वामी जी ने भ्रमरी प्राणायाम का अभ्यास करवाया उन्होंने कहा कि अपने आप को तनाव मुक्त रखने के लिए, मन को एकाग्रचित रखने के लिए, प्रेशर को खत्म करने के लिए,जिस बच्चे को पढ़ाई में मन नहीं लगता, चंचलता ज्यादा है उन्हें रोजाना इस प्राणायाम का अभ्यास करना चाहिए, लेकिन वैसे लोग जो डिप्रेशन से ग्रस्त हो उन्हें यह अभ्यास नहीं करनी चाहिए। आगे स्वामी जी ने कहा कि हमारे शरीर में तनाव का ज्यादा होना, चिंता का ज्यादा होना, अनिद्रा या बीमारी होना इसका मुख्य कारण शरीर में प्राण शक्ति की कमी है अतः इस प्राण शक्ति को शरीर में सुचारू ढंग से प्रभावित होने के लिए हमें रोजाना ही नियमबद्ध तरीके से योग का अभ्यास करना चाहिए और योग के अभ्यास को जैसे-तैसे नहीं करना चाहिए किसी योग्य शिक्षक के मार्गदर्शन में ही इसका अभ्यास करने से हमें इसका पूर्ण लाभ प्राप्त होता है। उन्होंने कहा कि विश्व का सबसे प्रसिद्ध योग संस्थान बिहार योग विद्यालय है, जिन्हें प्रधानमंत्री पुरस्कार, और पद्मश्री पुरस्कार प्रदान किया जा चुका है, वहां से प्रशिक्षित टीचर से योग सीखना श्रेयस्कर होगा।
कार्यक्रम को सफल बनाने में श्रीमान ठक्कर जी, श्रीमती प्रतिभा सिंह और बुद्धिमानी, श्रीमान लखन ठाकुर, श्रीमान मलाई दे, श्रीमान अश्वनी शुक्ला, श्रीमान राज शर्मा, श्रीमान प्रिंस अग्रवाल, श्रीमान आदित्य आदि का प्रमुख योगदान रहा।





