झारखंड उच्च न्यायालय परिसर में फुटबॉल ग्राउंड विकसित किए जाने के प्रस्ताव पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए झारखंड उच्च न्यायालय

अधिवक्ता गृह निर्माण स्वावलंबी सहकारी समिति के मुख्य कार्यपालक एवं अधिवक्ता धीरज कुमार ने कहा कि न्यायालय परिसर की सीमित भूमि का उपयोग सर्वप्रथम अधिवक्ताओं और न्यायिक व्यवस्था की मूलभूत आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए किया जाना चाहिए।
उच्च न्यायालय परिसर का उद्देश्य खेल गतिविधियों का केंद्र बनाना नहीं, बल्कि न्यायिक व्यवस्था को अधिक सक्षम, प्रभावी और सुलभ बनाना है। ऐसे में उपलब्ध भूमि का प्राथमिक उपयोग अधिवक्ताओं के चैंबर, अधिवक्ता भवन, आधुनिक विधि पुस्तकालय तथा रियायती दर पर आवासीय सुविधाओं के विकास के लिए होना चाहिए।
झारखंड उच्च न्यायालय अधिवक्ता गृह निर्माण स्वावलंबी सहकारी समिति पिछले लगभग दस वर्षों से अधिवक्ताओं, विशेषकर युवा एवं भूमिहीन अधिवक्ताओं, के लिए रियायती दर पर भूमि एवं आवास उपलब्ध कराने की मांग कर रही है। आज भी बड़ी संख्या में अधिवक्ता शहर में अपना आवास नहीं होने के कारण आर्थिक कठिनाइयों का सामना करते हुए पेशेवर दायित्व निभाने को विवश हैं।एक अधिवक्ता को न्यायालय में प्रभावी ढंग से कार्य करने के लिए चैंबर उतना ही आवश्यक है, जितना कि माननीय न्यायाधीश महोदय के लिए कोर्ट रूम एवं चैंबर ।
चैंबर के अभाव में अधिवक्ताओं को फाइलों के रख-रखाव, मुवक्किलों से गोपनीय चर्चा और मुकदमों की तैयारी में भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।
खेल सुविधाओं का अपना महत्व है, किन्तु न्यायालय परिसर की सीमित भूमि का उपयोग प्राथमिकता के आधार पर न्यायिक अवसंरचना के विस्तार के लिए होना चाहिए। देश के अनेक उच्च न्यायालयों तथा सर्वोच्च न्यायालय में अधिवक्ताओं के लिए बहुमंजिला चैंबर कॉम्प्लेक्स, अधिवक्ता कल्ब तथा बहुत ही रियायती दर पर सहकारी आवास योजनाओं को प्राथमिकता दी गई है। झारखंड में भी इसी प्रकार की दूरदर्शी योजना लागू करने की आवश्यकता है।
उच्च न्यायालय की बिल्डिंग एवं इंफ्रास्ट्रक्चर कमेटी से आग्रह है कि अधिवक्ताओं की बुनियादी आवश्यकताओं—विशेषकर चैंबर एवं सहकारी रियायती आवास—को सर्वोच्च प्राथमिकता के एजेंडे में शामिल करें।
अधिवक्ताओं को बेहतर कार्य वातावरण और सम्मानजनक आवास उपलब्ध कराना केवल बार का हित नहीं, बल्कि पूरी न्यायिक व्यवस्था को सशक्त बनाने का निवेश है। मजबूत अधिवक्ता ही मजबूत न्यायपालिका की आधारशिला हैं।
झारखंड उच्च न्यायालय प्रशासन को अधिवक्ताओं के व्यापक हितों और भविष्य की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए न्यायिक अवसंरचना के विकास में संतुलित एवं दूरदर्शी निर्णय लेना चाहिए।

धीरज कुमार, अधिवक्ता, मुख्य कार्यपालक ,
झारखंड उच्च न्यायालय अधिवक्ता गृह निर्माण स्वाबलंबी सहकारी समिति।

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