जमशेदपुर के मानगो थाना क्षेत्र अंतर्गत दाईगुट्टू मोची लाइन में पैतृक जमीन को लेकर चल रहा पारिवारिक विवाद अब एक बार फिर सुर्खियों में आ गया है। वर्षों पुराना यह मामला अब केवल पारिवारिक मतभेद तक सीमित नहीं रह गया, बल्कि आरोप-प्रत्यारोप, सामाजिक समझौते, थाने की शिकायत और कोर्ट में चल रही कानूनी प्रक्रिया के बीच एक गंभीर विवाद का रूप ले चुका है।
स्थानीय निवासी सुनीता देवी ने अपने जेठ बनारसी साव और उनके परिवार पर विवादित जमीन पर जबरन कब्जा करने की कोशिश का आरोप लगाया है। महिला का कहना है कि उनके पति की गैरमौजूदगी का फायदा उठाकर जमीन पर घेराबंदी कराई जा रही है। विरोध करने पर गाली-गलौज, धमकी और तनावपूर्ण माहौल की स्थिति उत्पन्न हो गई। घटना के बाद पीड़िता ने मानगो थाना पहुंचकर लिखित शिकायत सौंपी और मामले में सुरक्षा के साथ कानूनी कार्रवाई की मांग की।
बताया जा रहा है कि यह विवाद कोई नया नहीं है। पैतृक संपत्ति को लेकर परिवार के तीनों भाइयों के बीच लंबे समय से विवाद चल रहा था। विवाद लगातार बढ़ने पर समाज स्तर पर हस्तक्षेप किया गया। राष्ट्रीय तेली साहू महासंगठन की पहल पर पंचायत बुलाई गई, जमीन की मापी कराई गई और आपसी सहमति के आधार पर तीनों भाइयों के हिस्से का बंटवारा भी तय किया गया। उस समय उम्मीद जताई गई थी कि समझौते के बाद परिवार में शांति स्थापित हो जाएगी, लेकिन अब दोबारा विवाद सामने आने से पूरे समझौते पर सवाल खड़े हो गए हैं।
सुनीता देवी का आरोप है कि सामाजिक स्तर पर हुए फैसले को अब नजरअंदाज किया जा रहा है। उनका कहना है कि तय हिस्से के बावजूद जमीन पर कब्जे की कोशिश की जा रही है और परिवार के कुछ लोग दबाव बनाकर निर्माण और घेराबंदी कराने में लगे हैं। महिला ने यह भी दावा किया कि विवादित जमीन का मामला फिलहाल कोर्ट में विचाराधीन है, इसके बावजूद जमीन पर हस्तक्षेप की कोशिशें लगातार जारी हैं।
यही पहलू अब पूरे मामले को और अधिक गंभीर बना रहा है। कानूनी जानकारों की मानें तो जब कोई भूमि विवाद न्यायालय में विचाराधीन हो, तब किसी भी पक्ष द्वारा जमीन पर निर्माण, घेराबंदी या कब्जे की कोशिश विवाद को और जटिल बना सकती है। ऐसे मामलों में प्रशासन और स्थानीय पुलिस की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है, ताकि कानून व्यवस्था बनी रहे और किसी भी तरह की अप्रिय घटना को रोका जा सके।
इधर, मानगो थाना पुलिस ने शिकायत मिलने के बाद मामले की जांच शुरू कर दी है। हालांकि अभी तक पुलिस की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है, लेकिन स्थानीय लोगों के बीच इस बात को लेकर चर्चा तेज है कि आखिर पुलिस इस मामले को कितनी गंभीरता से लेती है। क्योंकि मामला केवल पारिवारिक विवाद भर नहीं, बल्कि कोर्ट में लंबित संपत्ति विवाद से भी जुड़ा हुआ है।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यदि समय रहते प्रशासन ने हस्तक्षेप नहीं किया तो विवाद और बढ़ सकता है। इलाके के लोगों के मुताबिक, जमीन विवाद अक्सर छोटे तनाव से शुरू होकर बड़े टकराव का रूप ले लेते हैं। ऐसे में पुलिस और प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह है कि दोनों पक्षों के बीच शांति बनाए रखते हुए कानूनसम्मत कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
दूसरी ओर, समाज स्तर पर हुए समझौते के बावजूद विवाद दोबारा उभरने से सामाजिक पंचायतों की प्रभावशीलता पर भी सवाल उठ रहे हैं। कई लोगों का मानना है कि जब तक कानूनी रूप से स्पष्ट आदेश और प्रशासनिक निगरानी नहीं होगी, तब तक ऐसे विवाद बार-बार सामने आते रहेंगे।
फिलहाल पूरे मामले पर सभी की नजर मानगो थाना और प्रशासनिक कार्रवाई पर टिकी हुई है। सबसे बड़ा सवाल यही है कि कोर्ट में विचाराधीन इस संवेदनशील जमीन विवाद में पुलिस कितनी निष्पक्षता और गंभीरता के साथ आगे की कार्रवाई करती है। आने वाले दिनों में पुलिस जांच और न्यायालय की प्रक्रिया ही तय करेगी कि इस विवाद का समाधान किस दिशा में आगे बढ़ता है।







