आनंद मार्ग के आध्यात्मिक एवं सामाजिक दर्शन से प्रभावित होकर प्रेमचंद जी ने सन 1982 में आनंद मार्ग की दीक्षा ली । उनका आनंद मार्ग समाज में बहुत बड़ा योगदान है आज उनके शरीर को एमजीएम मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल को दान दिया गया। उनकी इच्छा थी कि मेरे शरीर का दाह संस्कार नहीं बल्कि मेरे शरीर को मेडिकल पढ़ने वाले बच्चे लोग को शोध के लिए दान दे दिया जाए। दान के पूर्व आदर्श सेवा संस्थान प्रांगण में ईश्वर प्राणिधान आनंद मार्ग की पद्धति से संपन्न किया गया ।आनंद मार्ग की पद्धति के अनुसार प्रभात संगीत प्रस्तुत किए जिसके बोल थे “धर्म आमारई साथी धर्म आमराई प्राण, परम पुरुष के मानी आमी ए ताहाराई दान|| जीवनेर प्रथम प्रभाते से छीलो आमाराई साधे” उसके बाद आनंद मार्ग की पद्धति के अनुसार शोकाकुल स्वर में बाबा नाम केवलम कीर्तन का किया गया। मिलित ईश्वर प्राणिधान के बाद मृत शरीर को एमजीएम भेज दिया गया ।






