सारंडा एनकाउंटर के बाद नक्सली पूरी तरह डर के साये में जी रहे हैं और रनिंग कैंप में शिफ्ट हो गए हैं.

नोहरपुर : नक्सलियों के लिए सबसे सुरक्षित माने जाने वाले सारंडा जंगल में हुए इस एनकाउंटर के बाद जंगल में भगदड़ की स्थिति बन गई है. पुलिस के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, सारंडा में अभी भी 50 से 55 नक्सली सक्रिय हैं, जिनमें दो पर एक-एक करोड़ रुपये का इनाम है.
आईजी अभियान ने बताया कि बचे हुए नक्सली अब सुरक्षाबलों के रडार में आने से बचने के लिए रनिंग कैंप में शिफ्ट हो गए हैं. वे अब बीहड़ों में कैंप तो लगा रहे हैं, लेकिन कैंप केवल रात भर ही टिक पाता है. सुबह होते ही नक्सली अपना बोरिया-बिस्तर बांधकर दूसरे ठिकाने की ओर बढ़ जाते हैं, ताकि किसी तरह सुरक्षाबलों की नजर से बच सकें. इसके लिए उन्होंने रनिंग कैंप की व्यवस्था अपनाई है, जिसमें वे अपना सारा सामान साथ लेकर घूमते हैं और हर दिन ठिकाना बदलने को मजबूर हो गए हैं.

वर्तमान में भले ही नक्सली सारंडा में रनिंग कैंप में शिफ्ट हो गए हों, लेकिन एक समय ऐसा भी था जब वे बहुत मजबूत थे. सारंडा में नक्सलियों ने न सिर्फ स्थायी कैंप बनाए थे, बल्कि अंडरग्राउंड बंकर भी तैयार किए थे. घने जंगलों और बीहड़ों को नक्सलियों का सबसे सुरक्षित इलाका क्यों कहा जाता था, यह बात अब खुलकर सामने आ रही है.

जैसे-जैसे सुरक्षाबल जंगल के अंदर घुस रहे हैं, नक्सलियों द्वारा बनाई गई संरचनाओं को देखकर सभी हैरान हैं. नक्सलियों ने युद्ध जैसी रणनीति के तहत जंगल में मजबूत संरचनाएं तैयार की थीं, जिनके बल पर उन्होंने दशकों तक आतंक मचाया रहा.

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