बंद इंटरनेट कैसे कश्मीर के उद्योग और व्यापार को डुबो रहा है?

बीते चार महीने में मेरा तक़रीबन दस लाख रुपये का नुकसान हो चुका है. अपने काम को फिर से ज़िंदा करने के लिए मुझे श्रीनगर छोड़कर जम्मू आना पड़ा है.”

फ़ोन पर अपनी परेशानी बयां करते हुए शारिक़ अहमद कुछ इस तरह बात की शुरुआत करते हैं.

वो कहते हैं, “काम के सिलसिले में मुझे सात हज़ार रुपये का एक क़मरा किराये पर लेना पड़ा है. नए ब्रॉडबैण्ड कनेक्शन के दो हज़ार रुपये प्रति माह देने होंगे. घर से दूर बाकी ख़र्चे भी ज़्यादा करने होंगे.”

पिछले 25 दिनों से शारिक़ अहमद जम्मू में हैं. वो श्रीनगर में टूर एंड ट्रेवल से जुड़ी एक दुकान चलाते थे.

नए शहर में नए तरीक़े से काम जोड़ने पर ख़र्च बढ़ेंगे, इससे ज़्यादा चिंता उन्हें अपने बीवी-बच्चों की है जिन्हें शारिक़ को श्रीनगर में ही छोड़कर आना पड़ा.

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