हो भाषा को संविधान के आठवीं अनुसूची में शामिल करने की मांग को लेकर हो समाज के द्वारा विगत 21 अगस्त से दिल्ली के जंतर मंतर में धरना प्रदर्शन कर भारत सरकार का ध्यान आकृष्ट कराया गया था इस महा धरना के बाद हो समाज के लोग जम्मू तवी ट्रेन से टाटानगर रेलवे स्टेशन पहुंचे जहां समाज के लोगों ने उनका भव्य स्वागत किया
भारतवर्ष में अभी तक 22 भाषाओं को संवैधानिक मान्यता दी जा चुकी है और 40 भाषाएँ पंच लाइन में है जिन्हें बहुत जल्द संवैधानिक मान्यता मिल जाएगी पर हो भाषा को अब तक भारत के संविधान के आठवीं अनुसूची में शामिल नहीं करने से हो समाज के लोगों में काफी आक्रोश है, अपनी मांगों से भारत सरकार का ध्यान आकृष्ट कराने को लेकर पूरे कोल्हान से हो समाज के लोग 21 अगस्त को तीसरे महा धरना का आयोजन कर भारत सरकार का ध्यान आकृष्ट करवाये जानकारी देते हुए आदिवासी हो समाज युवा महासभा के केंद्रीय अध्यक्ष बबलू सुंडी ने कहा कि दो बार हो समाज के द्वारा दिल्ली के जंतर मंतर में धरना दिया जा चुका है तीसरी बार 21 अगस्त को महा धरना का आयोजन कर भारत सरकार का ध्यान इस मांग की ओर आकृष्ट कराया गया है उन्होंने कहा कि आज पूरे भारतवर्ष में हो समाज के लोगों की आबादी 40 लाख से ऊपर है जिनकी आबादी इतनी नहीं है उन्हें संवैधानिक मान्यता मिल गई और आज 100 वर्षों से ज्यादा अपने हक की लड़ाई लड़ रहे हो समाज को अब तक संवैधानिक मान्यता नहीं दिया जाना चिंता का विषय है उन्होंने कहा कि इस महा धरना के बाद भी अगर मांगे नहीं मानी गई तो 2024 के चुनाव में समाज के लोग राजनीतिक दलों को सबक सिखाने का काम करेंगे






