एमजीएम अस्पताल में जूनियर डॉक्टरों की अनिश्चितकालीन हड़ताल, स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग पर अड़े

एमजीएम अस्पताल में जूनियर डॉक्टरों की अनिश्चितकालीन हड़ताल, स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग पर अड़े

जमशेदपुर: शहर के महात्मा गांधी मेमोरियल मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (एमजीएम अस्पताल) में जूनियर डॉक्टरों ने स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग को लेकर अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू कर दी है। इस हड़ताल के कारण अस्पताल की स्वास्थ्य सेवाएं बुरी तरह प्रभावित हो गई हैं, जिससे मरीजों और उनके परिजनों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
सोमवार को बड़ी संख्या में जूनियर डॉक्टर अस्पताल परिसर के बाहर एकत्र हुए और सरकार के खिलाफ जमकर प्रदर्शन किया। डॉक्टरों ने आरोप लगाया कि वे पिछले पांच वर्षों से लगातार स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग कर रहे हैं, लेकिन अब तक उनकी मांगों पर कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया है। उनका कहना है कि कई बार संबंधित अधिकारियों और विभागीय प्रतिनिधियों द्वारा आश्वासन दिया गया, लेकिन हर बार मामला टाल दिया गया और आश्वासन केवल कागजों तक सीमित रह गया।
प्रदर्शन कर रहे डॉक्टरों का कहना है कि वर्तमान स्टाइपेंड उनके कार्यभार और जिम्मेदारियों के मुकाबले बेहद कम है। वे दिन-रात मरीजों की सेवा में लगे रहते हैं, बावजूद इसके उनकी आर्थिक स्थिति में सुधार नहीं किया जा रहा है। डॉक्टरों ने कहा कि वे 24 घंटे जनता की सेवा करते हैं और स्वास्थ्य व्यवस्था की रीढ़ माने जाते हैं, फिर भी सरकार उनकी समस्याओं को नजरअंदाज कर रही है।
जूनियर डॉक्टरों ने साफ शब्दों में कहा है कि जब तक उनकी स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग पूरी नहीं की जाती, तब तक वे अपनी हड़ताल वापस नहीं लेंगे। इस हड़ताल को मेडिकल कॉलेज के कुछ स्टाफ और सीनियर डॉक्टरों का भी समर्थन मिलने की बात सामने आ रही है, जिससे आंदोलन को और मजबूती मिली है।
हड़ताल का सीधा असर अस्पताल की ओपीडी और अन्य नियमित सेवाओं पर पड़ा है। कई विभागों में कामकाज प्रभावित हुआ है और मरीजों को इलाज के लिए लंबा इंतजार करना पड़ रहा है। हालांकि, जूनियर डॉक्टरों का कहना है कि वे इमरजेंसी सेवाओं को पूरी तरह बंद नहीं कर रहे हैं। गंभीर मरीजों का इलाज जारी है, लेकिन सीमित संसाधनों के कारण वहां भी दबाव बढ़ गया है।
अस्पताल प्रशासन की ओर से अब तक कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है, लेकिन सूत्रों के अनुसार स्थिति पर नजर रखी जा रही है और डॉक्टरों से बातचीत की कोशिश की जा सकती है। इधर, मरीजों और उनके परिजनों ने सरकार से जल्द हस्तक्षेप करने की मांग की है, ताकि स्वास्थ्य सेवाएं सामान्य हो सकें।
जूनियर डॉक्टरों की यह हड़ताल अब स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए एक बड़ी चुनौती बनती जा रही है। अगर जल्द समाधान नहीं निकला, तो इसका असर और व्यापक हो सकता है, जिससे आम जनता को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ेगा।

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