रांची, झारखंड विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन पर तीखा प्रहार किया है। दुमका में झामुमो के 47वें स्थापना दिवस समारोह में मुख्यमंत्री के भाषण के एक अंश पर प्रतिक्रिया देते हुए मरांडी ने सोशल मीडिया के माध्यम से कई गंभीर आरोप लगाए हैं।

हेमंत सोरेन के बयान पर बाबूलाल मरांडी का तीखा हमला

“झारखंड के आदिवासी आपकी जागीर नहीं हैं” — नेता प्रतिपक्ष

रांची, झारखंड विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन पर तीखा प्रहार किया है। दुमका में झामुमो के 47वें स्थापना दिवस समारोह में मुख्यमंत्री के भाषण के एक अंश पर प्रतिक्रिया देते हुए मरांडी ने सोशल मीडिया के माध्यम से कई गंभीर आरोप लगाए हैं।
दुमका में दिया गया विवादित बयान
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने दुमका में झामुमो स्थापना दिवस के मौके पर कहा था कि असम के चाय बागानों में ले जाए गए झारखंड के आदिवासी आज भी अपनी पहचान की लड़ाई लड़ रहे हैं। उन्हें अब तक आदिवासी का अधिकार और दर्जा नहीं दिया गया है। उन्होंने कहा कि जरूरत पड़ी तो हम पूरे झारखंड के आदिवासियों को असम लेकर जाएंगे।
मुख्यमंत्री के इस बयान के बाद राजनीतिक हलकों में बवाल मच गया है।

बाबूलाल मरांडी का पलटवार
सीएम के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने कहा कि झारखंड के आदिवासी आपकी जागीर नहीं हैं कि जब चाहें, जहां चाहें उन्हें राजनीतिक भीड़ का हिस्सा बना दें। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि आदिवासी वे बेबस विधायक नहीं हैं जिन्हें बसों में भरकर रायपुर भेज दिया जाए।
मरांडी ने कहा कि आदिवासी समाज अब जागरूक है और अपनी अस्मिता तथा अधिकारों की रक्षा के लिए सजग है।

शिबू सोरेन पर भी निशाना

मरांडी ने दिवंगत झामुमो संस्थापक शिबू सोरेन पर भी निशाना साधते हुए कहा कि आदिवासी समाज की भावनाओं और झारखंड आंदोलन को कुछ करोड़ रुपये में बेचने वाले अपने पिता की दकियानूसी सोच से बाहर आइए। उन्होंने कहा कि आज आदिवासी समाज अपने स्वाभिमान और पहचान को लेकर सजग हो चुका है।

हेमंत सरकार में आदिवासी असुरक्षित

मरांडी ने आरोप लगाया कि हेमंत सरकार में आदिवासी असुरक्षित हैं। उन्होंने कहा कि आदिवासी युवा सूर्या हांसदा की हत्या कर दी गई। रांची के सुभाष मुंडा और खूंटी के सोमा मुंडा की भी हत्या हुई। रिम्स-2 परियोजना के नाम पर आदिवासियों की जमीन हड़पने की कोशिश की गई। सिरमटोली में सरना स्थल की पवित्रता भंग करने का प्रयास हुआ।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि संथाल परगना से लेकर कोल्हान तक बांग्लादेशी घुसपैठियों को बसाने का खेल चल रहा है।

पेसा एक्ट पर बड़ा आरोप

मरांडी ने कहा कि पेसा एक्ट के नाम पर आदिवासियों के साथ विश्वासघात किया गया है। उनके अनुसार कन्वर्जन माफियाओं को खुश करने के लिए स्वशासन और पारंपरिक परंपराओं की परिभाषा बदल दी गई है। आदिवासियों के जल, जंगल और जमीन को खनन माफियाओं के हवाले किया जा रहा है, जिससे उनका जीवन और संस्कृति खतरे में पड़ गई है।

सरकार से जवाब की मांग

मरांडी ने कहा कि झारखंड में आदिवासी असुरक्षित, उपेक्षित और ठगे जा रहे हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर हेमंत सरकार में झारखंड की पहचान और आदिवासियों के अधिकारों के साथ यह अन्याय क्यों हो रहा है। उन्होंने मांग की कि मुख्यमंत्री इस पर स्पष्ट जवाब दें।

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