मेडिकल डायरेक्टर पहुंचीं रेलवे अस्पताल, पूछा – आदेश के 11 माह बाद भी क्यों नहीं बना महिला चेंजिंग रूम !

मेडिकल डायरेक्टर पहुंचीं रेलवे अस्पताल, पूछा – आदेश के 11 माह बाद भी क्यों नहीं बना महिला चेंजिंग रूम !

सीएमडी के स्वागत में पहुंचे रेलवे मेंस यूनियन के नेताओं ने सुनायी खरी-खरी, समस्याएं वही-आश्वासन भी मिला

TATANAGAR. दक्षिण पूर्व रेलवे की प्रधान मुख्य चिकित्सा निदेशक (PCMD/SER) श्रीमती अंजना मल्होत्रा ने गुरुवार को टाटानगर रेलवे अस्पताल का दौरा किया. मेडिकल डायरेक्टर चक्रधरपुर रेलमंडल के दाैरे पर थी और टाटानगर उनका अंतिम पड़ाव था. ब्रांच लाइन और चक्रधरपुर मुख्यालय अस्पताल का अवलोकन करने के बाद यहां पहुंची सीएमडी ने रुटीन निरीक्षण किया और डॉक्टरों से व्यवस्था की जानकारी ली.
रेलवे मेंस यूनियन के वरिष्ठ नेताओं ने यहां उनका स्वागत किया और याद दिलाया कि 18 अक्टूबर 2024 को आपने उनकी डिमांड पर महिला कर्मचारियों के लिए अस्पताल में अविलंब चेंजिंग रूम की व्यवस्था करने का आदेश दिया था, जो 11 माह बाद भी पूरा नहीं हो सका है. आज भी महिला सशक्तिकरण के नाम पर कर्मचारियों को अस्पताल के एक कोने में चादर घेरकर बनाये स्थान पर कपड़े बदलने पड़ रहे हैं.मेडिकल डायरेक्टर ने यूनियन की इस मांग पर हैरानी जतायी और जिम्मेदार लोगों से जानना चाहा कि आखिर उनके आदेश के 11 माह बाद भी यह स्थिति क्यों है ? हालांकि उन्होंने तत्काल एक कक्ष खाली कर महिला कर्मचारियों को बतौर चेजिंग रूम देने का निर्देश दे दिया. लेकिन यह सवाल अब भी कायम है कि मेडिकल डायरेक्टर के आदेश पर अनुपालन क्यों नहीं हुआ ? महिला कर्मचारियों की परेशानी रेल प्रशासन व यूनियन क्यों मौन रहे.हालांकि यूनियन ने सीएमडी के सामने रेलवे अस्पताल में खराब पड़ी अल्ट्रासाउंड मशीन का पुराना मामला भी उठाया और कहा कि किसी निजी सेंटर से अनुबंधन नहीं होने के कारण रेलकर्मियों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. ऐसे में एमआरआई एवं अल्ट्रासाउंड के लिए निजी सेन्टर से अनुबंध कराने, यूनियन ने अस्पताल की ओपीडी में वाटर कूलर लगाने, फिर से पैथोलॉजी की जांच शुरू कराने, टाटानगर अस्पताल में मरीजों की संख्या के अनुपात में डॉक्टरों एवं पारा मेडिकल कर्मचारियों की संख्या बढ़ाने, गंम्भीर रोगियों के लिए रेफरल नियम को आसान बनाने और रेफरल अस्पताल की संख्या बढ़ाने की मांग भी की.

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