रश्मि ने वर्ष 2017 में टाटा स्टील फाउंडेशन की ‘आकांक्षा परियोजना’ से जुड़कर अपनी शैक्षणिक यात्रा की शुरुआत की। उन्होंने अपनी स्कूली शिक्षा सेंट रॉबर्ट्स गर्ल्स स्कूल, हजारीबाग से पूरी की और इसके बाद जी.एम. ईवनिंग कॉलेज, हजारीबाग से स्नातक की उपाधि प्राप्त की। अपनी दृढ़ इच्छाशक्ति और निरंतर मेहनत के बल पर रश्मि रामगढ़ ज़िले के पीवीटीजी समुदाय से मैट्रिक और ग्रेजुएट दोनों परीक्षाएं सफलतापूर्वक पास करने वाली पहली छात्रा बन गईं।
रश्मि की उपलब्धि ‘आकांक्षा परियोजना’ के दीर्घकालिक प्रभाव की एक सशक्त मिसाल है और यह दर्शाती है कि समावेशी शिक्षा किस तरह वंचित समुदायों को मुख्यधारा से जोड़ने और सशक्त बनाने की क्षमता रखती है। आज माननीय राष्ट्रपति के साथ रश्मि की मुलाकात जहां उनकी व्यक्तिगत उपलब्धियों का जश्न है, वहीं यह पूरे पीवीटीजी समुदाय के युवाओं की बढ़ती आकांक्षाओं और उम्मीदों को भी दर्शाती है।
रश्मि के परिवार में उनके पिता सुधांशु बिरहोर, माता सावा देवी और छोटा भाई मनीष कुमार शामिल हैं, जो वर्तमान में दूसरी कक्षा में पढ़ाई कर रहा है। रश्मि की कहानी आदिवासी क्षेत्रों के सैकड़ों बच्चों के लिए एक प्रेरणास्त्रोत बन गई है, जो उन्हें बड़े सपने देखने और पूरे समर्पण के साथ शिक्षा के पथ पर आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित करती है।
आकांक्षा परियोजना के बारे में:
टाटा स्टील फाउंडेशन द्वारा संचालित ‘आकांक्षा परियोजना’ का उद्देश्य विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूह (PVTG) के छात्रों को शिक्षा के बेहतर अवसर प्रदान करना है। इस परियोजना के अंतर्गत छात्रों को आवासीय और गैर-आवासीय स्कूली शिक्षा, आर्थिक सहायता और मार्गदर्शन उपलब्ध कराया जाता है। अब तक यह पहल 80 से अधिक बिरहोर छात्रों को झारखंड के प्रमुख शैक्षणिक संस्थानों में शिक्षा जारी रखने का अवसर प्रदान कर चुकी है, जिससे न सिर्फ उनके भविष्य का मार्ग प्रशस्त हुआ है, बल्कि पूरे समुदाय में शिक्षा के प्रति जागरूकता और विश्वास भी बढ़ा है।




