रेलवे में नौकरी के नाम पर ठगी करने के मास्टरमाइंड अंशुमन प्रसाद को रेल पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है।

रेलवे में नौकरी के नाम पर ठगी करने के मास्टरमाइंड अंशुमन प्रसाद को रेल पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। रेल पुलिस ने अंशुमन और उनकी साली सुचित्रा को रांची से रविवार को गिरफ्तार किया। बेरोजगार युवाओं से ठगी करने के बाद अंशुमन पिछले एक महीने से मौज मस्ती कर रहा था। अंशुमन एक महीने से शिमला, कुल्लू-मनाली, धर्मशाला और हिल स्टेशनों की सैर कर रहा था। बड़े-बड़े होटलों में रुकने के साथ ही रेस्टोरेंट में लाखों रुपए खर्च भी कर डाले।

अंशुमन की गम्हरिया रेलवे स्टेशन पर टिकट की एजेंसी

थी। रेलवे पुलिस अंशुमन तक उसके बैंक खाते का पता

करने के बाद ट्रैकिंग कर पहुंची। अंशुमन द्वारा किए जा

रहे खर्च से पुलिस को उसके लोकेशन का पता चल रहा

था। रेल एसआईटी टीम ने अंशुमन को उसकी साली के

रांची स्थित आवास से गिरफ्तार किया। ठगी करने में

उसका साथ साली भी देती थी।

पूछताछ में कई अन्य नाम सामने आए हैं

प्रवीण पुष्कर, रेल एसपी, जमशेदपुर

सोनारी से ही गैंग ऑपरेट करता था अंशुमनरेल एसपी प्रवीण पुष्कर ने बताया कि अंशुमन से हुई पूछताछ में पता चला कि उसने 50 से अधिक बेरोजगारों से करोड़ों की ठगी की है। अंशुमन पिछले 3-4 साल से साली के साथ मिल कर ठगी कर रहा था। जो भी लोग नौकरी के नाम पर अंशुमन से ठगे गए हैं, वे रेल एसपी कार्यालय से संपर्क कर जानकारी दे सकते हैं। अंशुमन सोनारी से ही गैंग ऑपरेट करता था। गैंग में कई लोग शामिल हैं। इन सभी को पुलिस पकड़ेगी।

16 अप्रैल को हुआ था ठगी का खुलासा

नौकरी लगाने का झांसा देकर अंशुमन, अनुराग व सुचित्रा ने तमिलनाडु के धीविन कुमार, बंगाल नदिया के रूपम शाह और शुभाशीष मंडल से 21 लाख रुपए लिए थे। युवकों को बीरबांस स्टेशन पर बुकिंग क्लर्क की ट्रेनिंग के नाम पर 10-10 हजार रुपए देने का आश्वासन भी दिया था। अंशुमन की गम्हरिया रेलवे स्टेशन पर टिकट की एजेंसी थी। यहीं पर तीनों युवकों को रेलवे बुकिंग काउंटर संचालन का प्रशिक्षण दिया गया था। लेकिन लाइसेंस खत्म होने के बाद उन्हें विश्वास में रख कर बीरबांस स्टेशन पर काम लिया जा रहा था। बीरबांस से ही विजिलेंस टीम ने 16 अप्रैल को छापेमारी कर फर्जी नौकरी देने वाले गिरोह का भंडाफोड़ किया था।

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