जमशेदपुर:झारखंड सरकार के मुख्य सचिव को एक विस्तृत प्रतिवेदन सौंपते हुए राज्य में साधारण बालू, मिट्टी, पत्थर और अन्य सामान्य पदार्थों के उत्खनन एवं परिवहन को लेकर वैधानिक आजीविका अधिकारों की सुरक्षा की मांग उठाई गई है।

जमशेदपुर:झारखंड सरकार के मुख्य सचिव को एक विस्तृत प्रतिवेदन सौंपते हुए राज्य में साधारण बालू, मिट्टी, पत्थर और अन्य सामान्य पदार्थों के उत्खनन एवं परिवहन को लेकर वैधानिक आजीविका अधिकारों की सुरक्षा की मांग उठाई गई है। यह प्रतिवेदन जिला दण्डाधिकारी सह उपायुक्त, पूर्वी सिंहभूम के माध्यम से प्रेषित किया गया है, जिसमें MMDR Act, JMMC Rules 2004/2017 और संविधान की राज्य सूची की व्याख्या के आधार पर कई महत्वपूर्ण कानूनी बिंदु रखे गए हैं।

प्रतिवेदन में कहा गया है कि माननीय सर्वोच्च न्यायालय की नौ-न्यायाधीशीय संविधान पीठ ने Mineral Area Development Authority vs Steel Authority of India Ltd. (2024) मामले में स्पष्ट किया है कि केंद्र सरकार का नियंत्रण केवल उन्हीं खनिजों तक सीमित है जिन्हें संसद ने विशेष रूप से अधिसूचित किया है।इसके साथ ही Deepak Kumar बनाम State of Haryana मामले का उल्लेख करते हुए कहा गया कि राज्यों को अपनी भौगोलिक, सामाजिक और आर्थिक परिस्थितियों के अनुरूप स्थानीय नियमन का अधिकार प्राप्त है।

प्रतिवेदन में जोर देकर कहा गया कि संविधान की राज्य सूची की Entry-23 और Entry-50 अब भी प्रभावी हैं तथा साधारण पदार्थों के स्थानीय नियमन का अधिकार राज्यों के पास सुरक्षित है।इसमें यह भी उल्लेख किया गया कि building stone, ordinary sand, gravel और ordinary clay/earth को MMDR Act की धारा 3(e) के तहत “minor minerals” की विशेष श्रेणी में रखा गया है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि इनका नियमन सामान्य खनिजों से अलग प्रकृति का है।

प्रतिवेदन में कहा गया कि किसी भी पदार्थ को MMDR Act के प्रभाव वाले खनिज के रूप में मानने से पहले उसमें वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित mineral contents का होना आवश्यक है।इसके लिए भारत सरकार द्वारा अधिसूचित The Minerals (Evidence of Mineral Contents) Rules, 2015 तथा UNFC Standards एवं CRIRSCO Reporting System का हवाला दिया गया। मांग की गई कि जब तक वैज्ञानिक जांच में किसी पदार्थ में वैधानिक mineralisation प्रमाणित न हो, तब तक साधारण मिट्टी, बालू और इमारती पत्थरों पर कठोर खनन कानून लागू नहीं किया जाना चाहिए।

प्रतिवेदन में यह भी मांग उठाई गई कि जब तक राज्य सरकार अलग नियमावली लागू नहीं करती, तब तक साधारण पदार्थों के परिवहन एवं भंडारण को GST विपत्र/चालान के आधार पर वैध माना जाए। साथ ही जिला प्रशासन को Mines Act, 1952 के अंतर्गत अपने वैधानिक अधिकारों का प्रयोग करते हुए स्थानीय लोगों की आजीविका की रक्षा सुनिश्चित करने का आग्रह किया गया। राज्य सरकार द्वारा बालू घाटों को Category-I एवं Category-II में विभाजित किए जाने का उल्लेख करते हुए कहा गया कि इसका उद्देश्य पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखते हुए श्रम आधारित और नियंत्रित खनन व्यवस्था को लागू करना है।

प्रतिवेदन में मांग की गई कि राज्य सरकार प्रशासनिक अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश जारी करे कि साधारण पदार्थों पर MMDR कानूनों की कार्रवाई तभी हो जब वैज्ञानिक परीक्षण में उनमें खनिज तत्व प्रमाणित हों। साथ ही जिला दण्डाधिकारी से आग्रह किया गया कि वे इस पूरे प्रतिवेदन को अपनी अनुशंसा के साथ राज्य सरकार को अग्रसारित करें।

प्रतिवेदन सौंपने वालों में शामिल रहे: सनी खान, अमित पांडेय, सिद्धार्थ महाकुड़, संतोष यादव, दिलीप साही एवं श्याम हांसदा,सुभाष कुमार शाही, अभिषेक पांडा, संतोष अग्रवाल, गौतम सिंह, आलोक पांडेय, पापुन जेना, दीपक हेंब्रम, आशीष रॉय, लक्ष्मण शाह, शैलेन मंडल, रोहित गिरी, दिलीप मंडल, विकास दास, मझार मिर्धा, संजय मछुआ, निनी दा, समीर महाली, समलोचन महाकुड़, राजू दास, तपन दास, श्याम मुर्मू समेत कई लोग उपस्थित रहे।

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जमशेदपुर:झारखंड सरकार के मुख्य सचिव को एक विस्तृत प्रतिवेदन सौंपते हुए राज्य में साधारण बालू, मिट्टी, पत्थर और अन्य सामान्य पदार्थों के उत्खनन एवं परिवहन को लेकर वैधानिक आजीविका अधिकारों की सुरक्षा की मांग उठाई गई है।

पोटका : पूर्वी सिंहभूम जिला सेवा दल कांग्रेस कमेटी के तत्वावधान में पोटका प्रखंड सेवादल कांग्रेस कमेटी की एक महत्वपूर्ण बैठक सौरभ चटर्जी प्रखण्ड कांग्रेस अध्यक्ष के अध्यक्षता में पोटका ग्राम में आयोजित की गई।