कदमा उलियान की जमीन को सरकारी श्रेणी में शामिल करने पर उठे सवाल, कोर्ट पहुंचा मामला

कदमा उलियान की जमीन को सरकारी श्रेणी में शामिल करने पर उठे सवाल, कोर्ट पहुंचा मामला
जमशेदपुर : कदमा उलियान निवासी सोमन महतो (बापी) ने कदमा अनिल सूर पथ स्थित अपनी पैतृक जमीन की प्रकृति बदलकर उसे सरकारी श्रेणी में शामिल किए जाने पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि जिस जमीन पर उनके परिवार का वर्षों से कब्जा और स्वामित्व रहा है, उसे गलत तरीके से ‘अनाबाद बिहार सरकार’ की श्रेणी में डालकर टाटा लीज में शामिल कर दिया गया।
सोमन महतो ने अपने उलियान स्थित आवास पर आयोजित प्रेस वार्ता में बताया कि वर्ष 1985 तक उनके परिवार ने उक्त जमीन का नियमित रूप से सरकारी टैक्स (खजाना) जमा किया है। ऐसे में सवाल यह उठता है कि जिस जमीन पर सरकार टैक्स लेती रही, उसे अचानक सरकारी जमीन घोषित करने का आधार क्या है।
उन्होंने बताया कि विवादित जमीन का प्लॉट नंबर 1248 और 1231 है, जिसका नया नंबर 66, 67, 68, 69 और 74 है। वहीं इसका पुराना खाता नंबर 1 तथा नया खाता नंबर 1217 बताया गया है।
सोमन महतो के अनुसार, वर्ष 1907 के सर्वे रिकॉर्ड में उक्त जमीन की प्रकृति खेती की जमीन दर्ज थी और इसके मूल मालिक दुर्गा चरण महतो थे। बाद में उनके परिवार ने दुर्गा चरण महतो के पुत्र से यह जमीन खरीदी थी। वर्ष 1970 में नवंबर और दिसंबर माह में इस जमीन की दो अलग-अलग सेल डीड बनाई गई थी, जिसके बाद से यह जमीन उनके परिवार के नाम पर है।
उन्होंने कहा कि शुरुआत से ही यह जमीन रैयती प्लॉट रही है, लेकिन सरकारी रिकॉर्ड में गलती के कारण इसे ‘अनाबाद बिहार सरकार’ की श्रेणी में डाल दिया गया, जो उनके परिवार के साथ अन्याय है। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि यदि यह जमीन सरकारी थी, तो फिर इसकी रजिस्ट्री और म्यूटेशन कैसे हुआ और इतने वर्षों तक सरकार ने टैक्स क्यों लिया।
सोमन महतो ने बताया कि इस मामले को लेकर उन्होंने अदालत का दरवाजा खटखटाया है। यह मामला सिविल जज, जमशेदपुर सीनियर डिवीजन-9 की अदालत में केस नंबर 66/2022 के तहत विचाराधीन है। मामले की अगली सुनवाई आगामी 21 मई 2026 को निर्धारित की गई है।
उन्होंने उम्मीद जताई कि अदालत से उन्हें न्याय मिलेगा और जमीन से जुड़े वास्तविक दस्तावेजों के आधार पर सच्चाई सामने आएगी।

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