रांची में निजी स्कूलों पर सख्ती: फीस वृद्धि 10% तक सीमित, री-एडमिशन पर रोक
रांची, जिले में निजी स्कूलों की मनमानी पर रोक लगाने के लिए जिला प्रशासन ने कड़ा रुख अपनाया है। उपायुक्त मंजूनाथ भजन्त्री की अध्यक्षता में आयोजित बैठक में स्कूल प्रबंधन को स्पष्ट निर्देश दिया गया कि फीस में 10% से अधिक बढ़ोतरी नहीं की जा सकती और री-एडमिशन के नाम पर किसी भी प्रकार की वसूली पूरी तरह अवैध मानी जाएगी।
PTA और शुल्क समिति अनिवार्य
सभी स्कूलों में अभिभावक-शिक्षक संघ (PTA) का गठन अनिवार्य कर दिया गया है, जिसकी सूचना तीन दिनों के भीतर देनी होगी। साथ ही प्रत्येक विद्यालय में शुल्क निर्धारण के लिए स्कूल स्तरीय समिति बनाना भी जरूरी होगा।
फीस वृद्धि पर नियंत्रण
डीसी ने निर्देश दिया कि फीस वृद्धि कम से कम दो वर्षों के अंतराल पर ही की जाएगी और 10% की सीमा से अधिक नहीं होगी। सभी स्कूलों को 20 अप्रैल तक पिछले तीन वर्षों और वर्तमान सत्र की फीस का पूरा विवरण जमा करना होगा, जिस पर 21 अप्रैल को निर्णय लिया जाएगा।
री-एडमिशन और फॉर्म शुल्क पर रोक
री-एडमिशन को पूरी तरह गैरकानूनी बताते हुए डीसी ने कहा कि किसी भी अन्य नाम से भी इसकी वसूली नहीं की जा सकती। आवेदन फॉर्म के नाम पर अधिक शुल्क लेना भी प्रतिबंधित किया गया है।
छात्रों के अधिकारों की सुरक्षा
किसी छात्र को परीक्षा से वंचित करना, अतिरिक्त शुल्क के लिए दबाव बनाना या समय पर ट्रांसफर सर्टिफिकेट (TC) नहीं देना अब आपराधिक श्रेणी में आएगा और संबंधित स्कूलों पर कार्रवाई होगी।
किताब और यूनिफॉर्म के नए नियम
स्कूलों को किताबों की पूरी सूची (नाम, प्रकाशक, कीमत सहित) जिला शिक्षा विभाग में जमा करनी होगी।
छात्रों को किसी विशेष दुकान से किताब खरीदने के लिए बाध्य नहीं किया जाएगा
हर साल किताब या प्रकाशक बदलने पर रोक
NCERT के अलावा अन्य किताबों के लिए दबाव नहीं
यूनिफॉर्म को लेकर भी स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि बिना PTA की सहमति के बदलाव नहीं होगा और कम से कम पांच वर्षों तक एक ही यूनिफॉर्म लागू रहेगा। स्कूल परिसर में यूनिफॉर्म की बिक्री पर पूर्ण प्रतिबंध रहेगा।
परिवहन व्यवस्था पर भी नजर
स्कूल बसों के शुल्क को भी कुल फीस में शामिल किया जाएगा और यह 10% सीमा के भीतर ही रहेगा। सभी बसों में CCTV, GPS और अग्निशमन यंत्र अनिवार्य किए गए हैं।







