सदर अस्पताल में पंजीकरण व्यवस्था बेहाल, घंटों लाइन में खड़े रहने को मजबूर मरीज,
ऑनलाइन ओपीडी रजिस्ट्रेशन की सुविधा होने के बावजूद काउंटर पर पर्ची निकालने में हो रही भारी देरी, मरीज समय पर डॉक्टर को नहीं दिखा पा रहे
जमशेदपुर (खास रिपोर्ट) :
जमशेदपुर के खास महल स्थित सदर अस्पताल में पंजीकरण काउंटर की अव्यवस्था अब गंभीर समस्या का रूप ले चुकी है। रोजाना सैकड़ों की संख्या में इलाज कराने पहुंचने वाले मरीजों को घंटों लंबी कतार में खड़ा रहना पड़ रहा है। सुबह से ही अस्पताल परिसर में भीड़ उमड़ पड़ती है, लेकिन पंजीकरण की प्रक्रिया इतनी धीमी है कि कई मरीज डॉक्टर तक पहुंच ही नहीं पाते।
झारखंड सरकार द्वारा सभी सरकारी अस्पतालों में मोबाइल के माध्यम से ऑनलाइन ओपीडी रजिस्ट्रेशन की सुविधा शुरू की गई है, ताकि मरीजों को लाइन में लगने से राहत मिल सके। लेकिन सदर अस्पताल में यह व्यवस्था पूरी तरह प्रभावी साबित नहीं हो पा रही है। ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन कराने के बाद भी मरीजों को काउंटर से पर्ची निकलवाने के लिए लंबी कतार में खड़ा होना पड़ता है।
सिर्फ तीन काउंटर, मरीज सैकड़ों
सदर अस्पताल के पंजीकरण काउंटर पर फिलहाल केवल तीन काउंटर ही संचालित किए जा रहे हैं। प्रतिदिन सैकड़ों मरीजों की भीड़ के सामने यह संख्या बेहद कम है। इसी कारण सुबह से लेकर दोपहर तक काउंटर पर अफरा-तफरी की स्थिति बनी रहती है। मरीजों को एक-एक पर्ची के लिए आधे से एक घंटे तक इंतजार करना पड़ता है।
स्थिति यह है कि कई बार मरीजों की बारी आने तक डॉक्टरों का ओपीडी समय समाप्त हो जाता है। ऐसे में मरीजों को बिना इलाज कराए ही लौटना पड़ता है, जिससे उनमें भारी नाराजगी देखी जा रही है।
बुजुर्ग और महिलाओं को सबसे ज्यादा परेशानी
लाइन में खड़े मरीजों में बुजुर्ग, महिलाएं और गंभीर रूप से बीमार लोग भी शामिल रहते हैं। कई मरीजों को चक्कर आ जाने की घटनाएं भी सामने आई हैं। परिजनों का कहना है कि अस्पताल में बैठने और पानी जैसी मूलभूत सुविधाओं की भी समुचित व्यवस्था नहीं है। भीड़ के कारण कई बार धक्का-मुक्की की स्थिति भी बन जाती है।
एक मरीज ने बताया, “सुबह सात बजे अस्पताल आए थे, लेकिन दो घंटे बाद भी पर्ची नहीं बन पाई। डॉक्टर का समय खत्म हो गया, अब कल फिर आना पड़ेगा।”
ऑनलाइन व्यवस्था केवल नाम की
सरकार की ओर से शुरू की गई ऑनलाइन ओपीडी रजिस्ट्रेशन प्रणाली का उद्देश्य मरीजों को सुविधा देना था, लेकिन जमीनी स्तर पर इसका लाभ नहीं मिल पा रहा है। मरीजों का कहना है कि ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन के बाद भी उन्हें काउंटर पर खड़ा होना पड़ता है, जिससे पूरी प्रक्रिया का उद्देश्य ही खत्म हो जाता है।
स्थानीय लोगों का मानना है कि यदि ऑनलाइन पंजीकरण के लिए अलग काउंटर बनाया जाए और उसकी जांच तेजी से हो, तो मरीजों को बड़ी राहत मिल सकती है।
स्थानीय लोगों की मांग
स्थानीय नागरिकों और मरीजों ने अस्पताल प्रशासन से मांग की है कि:
पंजीकरण काउंटरों की संख्या बढ़ाई जाए
ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन कराने वालों के लिए अलग काउंटर खोला जाए
कर्मचारियों की संख्या बढ़ाकर प्रक्रिया को तेज किया जाए
बुजुर्ग और गंभीर मरीजों के लिए विशेष व्यवस्था की जाए
लोगों का कहना है कि सदर अस्पताल पूरे शहर और आसपास के ग्रामीण इलाकों के लिए प्रमुख सरकारी अस्पताल है, इसलिए यहां की व्यवस्था दुरुस्त होना बेहद जरूरी है।
प्रशासन की चुप्पी पर सवाल
अब सवाल यह उठता है कि जब सरकार डिजिटल स्वास्थ्य सेवाओं को बढ़ावा दे रही है, तो फिर मरीजों को उसका पूरा लाभ क्यों नहीं मिल पा रहा। अस्पताल प्रशासन की ओर से अब तक इस समस्या के समाधान को लेकर कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है।
जरूरत है कि जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग इस ओर गंभीरता से ध्यान दे और पंजीकरण व्यवस्था को सुचारू बनाए। जब तक काउंटरों की संख्या नहीं बढ़ेगी और ऑनलाइन प्रणाली को सही ढंग से लागू नहीं किया जाएगा, तब तक मरीजों को इसी तरह घंटों लाइन में खड़ा होकर परेशानी झेलनी पड़ेगी।
सदर अस्पताल की पंजीकरण व्यवस्था में सुधार न होने की स्थिति में आम जनता का भरोसा सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं से उठ सकता है। समय रहते यदि प्रशासन ने ठोस कदम नहीं उठाए, तो यह समस्या आने वाले दिनों में और गंभीर रूप ले सकती है।






