गिरिडीह में झामुमो की रणनीतिक जीत, दुमका में दो निर्विरोध विजेता – बीजेपी और कांग्रेस के लिए झटका
गिरिडीह/दुमका/चाईबासा नगर निकाय चुनाव के महापौर पद को लेकर झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) ने रणनीति के स्तर पर बढ़त बना ली है। पार्टी ने गिरिडीह में मेयर पद के लिए नामांकन करने वाले चार में से तीन प्रत्याशियों को मनाने में सफलता हासिल की है। अब मैदान में पार्टी से जुड़ा सिर्फ एक चेहरा — प्रमिला मेहरा — बची हैं, जिन्हें झामुमो ने आधिकारिक समर्थन दिया है।
झामुमो की घोषणा के बाद पार्टी कार्यकर्ताओं के बीच एकजुटता दिखी और नामांकन करने वाले पप्पू रजक एवं बृजमोहन तुरी ने अपना नाम वापस ले लिया। झामुमो जिलाध्यक्ष संजय सिंह ने कहा, “पार्टी प्रमिला मेहरा के समर्थन में एकजुट है, सभी कार्यकर्त्ता उनकी जीत के लिए पूरी ताकत झोंक देंगे।”
बीजेपी और कांग्रेस में असंतोष बरकरार
वहीं दूसरी ओर बीजेपी और कांग्रेस दोनों ही दल अपने ‘बागी’ उम्मीदवारों को मनाने में असफल रहे।
बीजेपी ने डॉ. शैलेंद्र चौधरी को अधिकृत समर्थन दिया है, परंतु कामेश्वर पासवान, प्रकाश कुमार दास और नागेश्वर दास ने नाम वापस नहीं लिया।
बीजेपी नगर जिलाध्यक्ष रंजीत राय ने कहा, “यह दलगत चुनाव नहीं है, लेकिन पार्टी डॉ. शैलेंद्र चौधरी के साथ मजबूती से खड़ी है।”
इसी तरह कांग्रेस ने डॉ. समीर राज चौधरी को समर्थन दिया है, लेकिन जोगेश्वर महथा और पंकज सागर ने भी नाम वापस लेने से इनकार कर दिया। कांग्रेस जिलाध्यक्ष सतीश केडिया ने बताया कि पूरा मामला प्रदेश समिति को भेजा गया है।
दुमका: दो वार्डों में निर्विरोध जीत
दुमका नगर परिषद क्षेत्र में 21 वार्डों के लिए नामांकन पत्रों की जांच और वापसी प्रक्रिया पूरी हो चुकी है।
वार्ड 13 से जूही रानी केसरी निर्विरोध विजेता घोषित हुई हैं, जबकि वार्ड 20 से मनोज सिंह लगातार चौथी बार निर्विरोध चुने गए।
अब शेष 19 वार्डों के लिए 79 प्रत्याशी मैदान में रहेंगे। शनिवार को सभी को चुनाव चिह्न आवंटित किए जाएंगे।
निर्वाचित जूही रानी केसरी ने कहा, “जनता के आशीर्वाद से सेवा का मौका मिला है, क्षेत्र की हर समस्या का समाधान प्राथमिकता होगी।”
चाईबासा: प्रशासन अलर्ट मोड में
चाईबासा में नगर पालिका चुनाव शांतिपूर्ण और निष्पक्ष कराने को लेकर प्रशासन पूरी तरह सक्रिय है।
उपायुक्त चंदन कुमार और पुलिस अधीक्षक अमित रेनू की संयुक्त अध्यक्षता में उच्च स्तरीय बैठक आयोजित की गई, जिसमें सुरक्षा व्यवस्था, संवेदनशील बूथों की पहचान और निगरानी व्यवस्था की समीक्षा की गई







