झारखंड हाई कोर्ट ने जमशेदपुर शहर में अवैध निर्माण के खिलाफ कड़ा रुख अपनाते हुए 24 अवैध संरचनाओं को एक महीने के भीतर ध्वस्त करने का आदेश दिया है।

झारखंड हाई कोर्ट ने जमशेदपुर शहर में अवैध निर्माण के खिलाफ कड़ा रुख अपनाते हुए 24 अवैध संरचनाओं को एक महीने के भीतर ध्वस्त करने का आदेश दिया है। यह निर्देश झारखंड हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस एमएस सोनक और जस्टिस एसएन प्रसाद की खंडपीठ ने जमशेदपुर अधिसूचित क्षेत्र समिति (JNAC) को दिया है।
यह आदेश राकेश झा द्वारा दायर जनहित याचिका (PIL) की सुनवाई के दौरान पारित किया गया। याचिका में जमशेदपुर के विभिन्न इलाकों में नियमों को ताक पर रखकर किए जा रहे अवैध निर्माणों का मुद्दा उठाया गया था। अदालत ने मामले को गंभीर मानते हुए स्पष्ट कहा कि अनियोजित शहरीकरण को किसी भी हाल में बढ़ावा नहीं दिया जा सकता।
हाई कोर्ट के आदेश के अनुसार साकची, बिष्टुपुर, सोनारी और कदमा जैसे प्रमुख इलाकों में चिन्हित 24 अवैध निर्माणों पर कार्रवाई की जाएगी। कोर्ट ने जेएनएसी को निर्देश दिया है कि वह तय समय-सीमा के भीतर सभी अवैध निर्माणों को हटाकर इसकी विस्तृत अनुपालन रिपोर्ट 25 फरवरी 2026 तक अदालत में प्रस्तुत करे।
कोर्ट ने यह भी टिप्पणी की कि नियमों के उल्लंघन से न केवल शहर की व्यवस्था प्रभावित होती है, बल्कि भविष्य में नागरिकों को भी भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है। इस आदेश के बाद जमशेदपुर में अवैध निर्माण करने वालों में हड़कंप मच गया है, वहीं प्रशासन पर अब कार्रवाई को लेकर दबाव बढ़ गया है।
माना जा रहा है कि हाई कोर्ट के इस सख्त फैसले से जमशेदपुर में अनियोजित शहरीकरण पर रोक लगेगी और भविष्य में अवैध निर्माण के मामलों में कमी आएगी।

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