जिस राज्य में सरकार कमजोर, दिशाहीन और पूरी तरह निष्क्रिय हो जाती है
वहाँ हत्या, फिरौती, चोरी, झपटमारी, बाइक चोरी, अपहरण और लूट
अपराध नहीं बल्कि रोज़मर्रा की सच्चाई बन जाते हैं।
आज दुर्भाग्य से हेमंत सोरेन की सरकार में झारखंड
उसी भयावह अराजकता से गुजर रहा है।
राज्य की कानून-व्यवस्था पूरी तरह चरमरा चुकी है,
अपराधी बेखौफ हैं
और आम जनता डर के साये में जीने को मजबूर है।
सरकार की नाकामी का आलम यह है कि
अपराध लगातार बढ़ रहे हैं,
लेकिन सत्ता में बैठे लोग आंख मूंदे हुए हैं।
पुलिस व्यवस्था पर राजनीतिक दबाव हावी है
और अपराधियों को सत्ता का अप्रत्यक्ष संरक्षण मिल रहा है।
यह स्थिति साफ तौर पर बताती है कि
वर्तमान झारखंड सरकार राज्य चलाने में पूरी तरह विफल हो चुकी है।
आज झारखंड में सुशासन नहीं,
जंगलराज कायम है।
भारतीय जनता पार्टी युवा मोर्चा के जिला अध्यक्ष एवं
कोल्हान विश्वविद्यालय के पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष
नीतीश कुशवाहा
इस जंगलराज, अपराधी संरक्षण और निकम्मे शासन के खिलाफ
सड़क से लेकर सदन तक संघर्ष करेगा
और जनता की जान-माल की सुरक्षा से
किसी भी कीमत पर समझौता नहीं किया जाएगा।
अब झारखंड की जनता सीधा सवाल पूछ रही है —
क्या यही है सरकार का तथाकथित सुशासन?
क्या यह राज्य अपराधियों के लिए सुरक्षित और
आम जनता के लिए असुरक्षित बना दिया गया है?
झारखंड को अब
खोखले वादे नहीं,
मजबूत नेतृत्व, सख्त कानून और जीरो टॉलरेंस प्रशासन चाहिए।






