गम्हरिया घोड़ा बाबा मंदिर में उमड़ा आस्था का जनसैलाब, ‘अखान जात्रा’ पर भक्तों ने टेका माथा, बलराम जीउ की पूजा और मिट्टी के घोड़ों की भें
गम्हरिया : झारखंड की लोक संस्कृति और अटूट आस्था का प्रतीक ‘अखान जात्रा’ के अवसर पर गम्हरिया स्थित घोड़ा बाबा मंदिर (बड़ाम थान) में भक्तों की भारी भीड़ उमड़ी। मकर संक्रांति और टुसू पर्व के ठीक अगले दिन आयोजित होने वाले इस वार्षिक पूजनोत्सव में अहले सुबह से ही श्रद्धालु बाबा के दर्शन के लिए कतारों में खड़े नजर आए।
इतिहास और मान्यता:
गम्हरिया स्थित इस मंदिर में भगवान बलराम को ‘ग्राम देवता’ के रूप में पूजा जाता है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, सदियों पहले यह क्षेत्र भीषण महामारी की चपेट में था। उस समय पूर्वजों ने संकट से मुक्ति के लिए भगवान बलराम का आह्वान किया था और उनके वाहन के रूप में मिट्टी के घोड़े की स्थापना की थी। कहा जाता है कि इसके बाद क्षेत्र से महामारी का पूर्णतः अंत हो गया। तभी से यह परंपरा निरंतर चली आ रही है।
पूजा और मेला:
आज भी लोग अपनी मन्नतें पूरी होने पर बाबा को मिट्टी के घोड़े अर्पित करते हैं। मंदिर परिसर में स्थानीय कुम्हार समाज द्वारा विशेष पूजा-अर्चना की जाती है। इस मौके पर मंदिर प्रांगण में एक विशाल मेले का आयोजन किया गया, जहाँ हजारों लोगों ने झूलों और व्यंजनों का आनंद लिया। समिति द्वारा आगंतुकों के लिए
भोग’ की भी व्यवस्था की गई थी। अखान जात्रा का यह दिन केवल धार्मिक अनुष्ठान ही नहीं, बल्कि क्षेत्र की सांस्कृतिक एकता और गौरवशाली इतिहास का उत्सव भी बन गया है।






