समाज की नि:स्वार्थ सेवा के बिना कोई भी परम पुरुष के निकट में नहीं आ सकत
बिना ध्यान साधना के अभ्यास के कोई भी समाज की निस्वार्थ सेवा नहीं कर सकता।
जमशेदपुर :
आनंद मार्ग प्रचारक संघ के स्थापना दिवस के अवसर पर पूर्णिमा नेत्रालय में 20 लोगों के मोतियाबिंद का फेको सर्जरी कर लेंस प्रत्यारोपण किया गया। इस अवसर पर सुनील आनंद ने कहा कि
भागवत् सेवा के द्वारा ही कोई भक्ति में प्रतिष्ठित होता है। अतः भक्त का जीवन आदर्श क्या होना चाहिए? जीव का जीवन आदर्श क्या होना चाहिए? ” आत्म मोक्षार्थं जगत हिताय च”। परम पुरुष के साथ एक होने के लिए परम पुरुष का ध्यान और साथ-साथ मन को पवित्र करने के लिए मानव समाज की सेवा । समाज की नि:स्वार्थ सेवा के बिना कोई भी परम पुरुष के निकट में नहीं आ सकता। बिना ध्यान साधना के अभ्यास के कोई भी समाज की निस्वार्थ सेवा नहीं कर सकता। याद रखना चाहिए कि जीवन का आदर्श “आत्म मोक्षार्थं जगत् हिताय च” होना चाहिए ।






