पोटका में दुखनी सोरेन की सक्रियता से बढ़ी सियासी सरगर्मी, गांव-गांव पहुंचकर सुनी लोगों की समस्याएं

पोटका में दुखनी सोरेन की सक्रियता से बढ़ी सियासी सरगर्मी, गांव-गांव पहुंचकर सुनी लोगों की समस्याएं
जमशेदपुर/पोटका : झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री चंपई सोरेन की पुत्री दुखनी सोरेन की पोटका क्षेत्र में बढ़ती सक्रियता ने राजनीतिक हलचल तेज कर दी है। समाजसेवा के जरिए क्षेत्र में लगातार जनसंपर्क अभियान चला रहीं दुखनी सोरेन अब ग्रामीण इलाकों में तेजी से अपनी पहचान बना रही हैं। स्थानीय राजनीतिक गलियारों में इसे आगामी चुनाव और संभावित परिसीमन के बाद नई राजनीतिक जमीन तैयार करने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।
मंगलवार को दुखनी सोरेन ने पोटका प्रखंड के दर्जनों गांवों का दौरा किया और ग्रामीणों से मुलाकात कर उनकी समस्याएं सुनीं। इस दौरान उन्होंने सड़क, पेयजल, शिक्षा, स्वास्थ्य और राशन जैसी बुनियादी समस्याओं को लेकर लोगों से बातचीत की। ग्रामीणों ने भी खुलकर अपनी परेशानियां उनके सामने रखीं।
दौरे के दौरान हरिना पंचायत अंतर्गत पांडु सोली गांव में स्कूल बंद कराए जाने की सूचना मिलने पर दुखनी सोरेन वहां पहुंचीं और बच्चों एवं अभिभावकों से मुलाकात की। उन्होंने पूरे मामले को दुखद बताते हुए कहा कि शिक्षा जैसे महत्वपूर्ण विषय पर किसी भी प्रकार की राजनीति नहीं होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि बच्चों का भविष्य सबसे अहम है और स्कूल बंद होने से सबसे अधिक नुकसान गरीब और ग्रामीण परिवारों के बच्चों को होता है।
दुखनी सोरेन ने कहा कि वे राजनीति से पहले समाजसेवा को प्राथमिकता दे रही हैं और क्षेत्र के लोगों की समस्याओं को समझने का प्रयास कर रही हैं। उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में आज भी कई मूलभूत सुविधाओं की कमी है, जिसे दूर करने की जरूरत है।
इधर, दुखनी सोरेन की लगातार बढ़ती सक्रियता को लेकर पोटका की राजनीति में चर्चाओं का दौर तेज हो गया है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि चंपई सोरेन के राजनीतिक अनुभव और जनाधार का लाभ दुखनी सोरेन को मिल सकता है। वहीं क्षेत्र में उन्हें मिल रहे समर्थन को भी आने वाले समय में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
ग्रामीणों के बीच उनकी बढ़ती मौजूदगी और लगातार जनसंपर्क अभियान ने यह संकेत दे दिया है कि आने वाले दिनों में पोटका की राजनीति में नई समीकरण देखने को मिल सकते हैं।

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