नई दिल्ली: देश और दुनिया में मानसिक समस्याएं बढ़ती जा रही हैं. डिप्रेशन और तनाव के शिकार लोग अक्सर आत्महत्या जैसे खतरनाक कदम भी उठा रहे हैं. इन समस्याओं के प्रति लोगों को जागरूक करने के लिए प्रतिवर्ष 10 अक्टूबर को वर्ल्ड मेंटल हेल्थ डे मनाया जाता है. इस दिन लोगों को मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं और उनसे निपटने के लिए भी जागरूक किया जाता है.
विशेषज्ञों का मानना है कि तेज़ी से बदलती जीवनशैली और सामाजिक ढाँचों में हो रहे बदलावों ने मानसिक स्वास्थ्य पर गंभीर असर डाला है. परिवारों के ढांचे में परिवर्तन, काम का बढ़ता दबाव, प्रतिस्पर्धी माहौल, सामाजिक मेलजोल में कमी, नशे की बढ़ती प्रवृत्ति और डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म पर अत्यधिक निर्भरता ने लोगों के मानसिक संतुलन को गहराई से प्रभावित किया है. ये सभी कारक मिलकर चिंता, अवसाद, अनिद्रा और सामाजिक अलगाव जैसी स्थितियों को जन्म दे रहे हैं.
इहबास अस्पताल में मनोचिकित्सा विभाग के प्रोफेसर डॉ ओम प्रकाश का कहना है कि मानसिक स्वास्थ्य के प्रति उपेक्षा की प्रवृत्ति अब भी बनी हुई है और यही सबसे बड़ी चुनौती भी है. जब तक मानसिक स्वास्थ्य को शारीरिक स्वास्थ्य जितनी प्राथमिकता नहीं दी जाएगी, तब तक इस बढ़ती समस्या पर नियंत्रण पाना मुश्किल होगा. समय पर लक्षणों की पहचान और इलाज ही इससे निपटने का सबसे सशक्त उपाय है.
डॉक्टर के अनुसार देश में मानसिक समस्याओं के प्रति जागरूकता तो बढ़ी है लेकिन उसके हिसाब से अभी मनसिक रोग का इलाज हर जगह उपलब्ध नहीं हो पाया है. हालांकि देश की राजधानी दिल्ली के चार प्रमुख बड़े अस्पतालों में मानसिक समस्याओं का बड़े स्तर पर इलाज उपलब्ध है. इन अस्पतालों में सिर्फ देसी नहीं बल्कि विदेशों से भी मरीज इलाज करने आते हैं. आइए जानते हैं दिल्ली के कौन कौन से अस्पतालों में उपलब्ध है मानसिक रोगों का इलाज.






