जमशेदपुर: भारतीय डाक विभाग (जमशेदपुर एवं बिष्टुपुर डाक मंडल) द्वारा आगामी रक्षाबंधन पर्व के अवसर पर आयोजित की जा रही ‘राखी मेकिंग प्रतियोगिता’ को शहर के प्रतिष्ठित विद्यालयों का भरपूर समर्थन मिल रहा है। इस अभियान का उद्देश्य विद्यार्थियों को भारतीय संस्कृति, पारिवारिक मूल्यों, पर्यावरण संरक्षण और डाक सेवाओं से जोड़ना है। प्रतियोगिता के तहत बच्चे अपने हाथों से ईको-फ्रेंडली राखियां बनाएंगे, जिन्हें अपने भाइयों के साथ-साथ देश की सीमाओं पर तैनात वीर सैनिकों को स्पीड पोस्ट के माध्यम से भेजा जाएगा।
इसी क्रम में डाक विभाग के प्रतिनिधियों ने शहर के कई प्रमुख विद्यालयों का दौरा कर प्राचार्यों एवं प्रधानाचार्यों से मुलाकात की और प्रतियोगिता की विस्तृत जानकारी साझा की। सभी विद्यालयों ने इस पहल का स्वागत करते हुए अधिकतम छात्र-छात्राओं की भागीदारी सुनिश्चित करने का आश्वासन दिया।
श्री कृष्णा पब्लिक स्कूल: रक्षाबंधन रिश्तों को जोड़ने वाला सबसे पवित्र पर्व
श्री कृष्णा पब्लिक स्कूल, बिष्टुपुर की प्रिंसिपल श्रीमती पूर्णिमा त्रिपाठी ने कहा कि विद्यालयों में अनेक प्रकार की प्रतियोगिताएं होती हैं, लेकिन यह पहल सबसे अलग और विशेष है क्योंकि यह बच्चों को उनके मूल रिश्तों और भावनाओं से जोड़ती है।
उन्होंने कहा कि आज की युवा पीढ़ी फ्रेंडशिप डे जैसे आयोजनों की ओर अधिक आकर्षित हो रही है, जबकि रक्षाबंधन स्वस्थ, पवित्र और मजबूत रिश्तों का प्रतीक है। बच्चों द्वारा स्वयं राखी बनाकर भाई या सीमा पर तैनात सैनिकों को भेजना उनमें संवेदनशीलता, प्रेम और राष्ट्रभक्ति की भावना विकसित करेगा।
उन्होंने भारतीय डाक विभाग का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि लंबे समय बाद किसी विभाग ने ऐसे मूलभूत सामाजिक विषय पर सार्थक पहल की है।
“बंधन हर जगह अच्छा होता है, लेकिन वह स्वस्थ और मजबूत रिश्तों की नींव पर आधारित होना चाहिए।”
— श्रीमती पूर्णिमा त्रिपाठी, प्रिंसिपल
लोयला स्कूल: भाईचारे और राष्ट्रभक्ति का अनूठा संगम
लोयला स्कूल, बिष्टुपुर के प्रधानाचार्य फादर विनोद फर्नांडिस ने कहा कि यह प्रतियोगिता बच्चों में प्रेम, भाईचारे और एक-दूसरे के प्रति सम्मान की भावना को मजबूत करेगी।
उन्होंने विशेष रूप से इस बात की सराहना की कि बच्चों द्वारा बनाई गई राखियां देश की सीमाओं पर तैनात सैनिकों तक पहुंचेंगी, जिससे विद्यार्थियों में राष्ट्ररक्षकों के प्रति सम्मान और कृतज्ञता की भावना विकसित होगी।
हिल टॉप स्कूल: समाज में प्रेम और समरसता बढ़ाएगी पहल
हिल टॉप स्कूल, टेल्को की प्राचार्या श्रीमती उमा तिवारी ने कहा कि रक्षाबंधन केवल एक धागा नहीं बल्कि समाज में प्रेम, विश्वास और सामाजिक समरसता का प्रतीक है।
उन्होंने बताया कि विद्यालय के विशेष (Differently Abled) बच्चे भी इस प्रतियोगिता में भाग लेंगे और अपनी भावनाओं को हस्तनिर्मित राखियों के माध्यम से व्यक्त करेंगे।
“डाक विभाग का यह प्रयास समाज में प्रेम, मिठास और जुड़ाव को पुनर्जीवित करने की दिशा में अत्यंत सराहनीय कदम है।”
जे.एच. तारापोर स्कूल: संस्कृति और रचनात्मकता का संगम
जे.एच. तारापोर स्कूल, धातकीडीह की प्रधानाचार्या श्रीमती लता शरत ने प्रतियोगिता की सराहना करते हुए कहा कि इससे विद्यार्थी रक्षाबंधन के वास्तविक महत्व को समझेंगे और अपनी रचनात्मक प्रतिभा का प्रदर्शन भी कर सकेंगे।
डी.बी.एम.एस. गर्ल्स हाई स्कूल ने किया स्वागत
डी.बी.एम.एस. गर्ल्स हाई स्कूल की प्रधानाचार्या श्रीमती सी. कनक डारा ने भारतीय डाक विभाग की इस अनूठी पहल की प्रशंसा करते हुए प्रतियोगिता को पूर्ण सहयोग देने का भरोसा दिलाया।
इस अवसर पर श्रीमती कमला सुब्रह्मण्यम ने भी रक्षाबंधन के महत्व और भाई-बहन के पवित्र रिश्ते पर अपने विचार साझा किए।
ADLS सनशाइन स्कूल: ईको-फ्रेंडली राखियों पर रहेगा विशेष जोर
कदमा स्थित ADLS सनशाइन स्कूल की प्रिंसिपल श्रीमती मंजू सिंह ने वीडियो संदेश जारी कर कहा कि यह पहल बच्चों को पर्यावरण संरक्षण और भारतीय संस्कृति दोनों से जोड़ने का महत्वपूर्ण माध्यम बनेगी।
उन्होंने कहा कि बच्चे इस बार बाजार या ऑनलाइन खरीदी गई राखियों के बजाय स्वयं ईको-फ्रेंडली राखियां बनाएंगे, जिससे त्योहार की आत्मीयता और भी बढ़ेगी।
बेलडीह चर्च स्कूल: धर्म से ऊपर है रक्षाबंधन का रिश्ता
बेलडीह चर्च स्कूल की प्रधानाचार्या श्रीमती एस्थर मोहंती ने कहा कि रक्षाबंधन भाई-बहन के पवित्र और निष्कलंक रिश्ते का पर्व है, जिसमें किसी प्रकार का धार्मिक भेदभाव नहीं है।
उन्होंने कहा कि जब बच्चे अपनी बनाई राखियां डाक के माध्यम से भेजेंगे और उन्हें उसकी रसीद प्राप्त होगी, तो यह उनके लिए अविस्मरणीय अनुभव होगा।
गुलमोहर हाई स्कूल: डिजिटल दौर में परंपरा को जीवित रखने की पहल
गुलमोहर हाई स्कूल की प्रिंसिपल एवं CISCE जोनल कॉर्डिनेटर श्रीमती प्रीति सिन्हा ने कहा कि आज के डिजिटल युग में बच्चों द्वारा स्वयं राखी बनाकर डाक के माध्यम से भेजना भारतीय संस्कृति और पारंपरिक मूल्यों को पुनर्जीवित करने वाला प्रयास है।
दयानंद पब्लिक स्कूल: पत्र और राखी का अपना अलग ही अपनापन
दयानंद पब्लिक स्कूल की प्रधानाचार्या श्रीमती अर्चना रेहाल ने कहा कि आधुनिक तकनीक के दौर में युवा पीढ़ी केवल ऑनलाइन माध्यमों तक सीमित होती जा रही है। ऐसे समय में भारतीय डाक विभाग का यह प्रयास बच्चों को पत्रों और राखियों में छिपे प्रेम, स्नेह और अपनत्व का महत्व समझाएगा।
वैली व्यू इंग्लिश स्कूल: बाजार नहीं, अपने हाथों से बनाएं राखी
वैली व्यू इंग्लिश स्कूल, टेल्को की प्रिंसिपल श्रीमती मिक्की सिन्हा ने विद्यार्थियों के साथ-साथ शहर की सभी बहनों से अपील की कि वे बाजार की तैयार राखियों के बजाय स्वयं अपने हाथों से राखी बनाएं। उन्होंने यह भी कहा कि जिन बहनों का कोई भाई नहीं है, वे अपनी राखियां सीमा पर तैनात सैनिकों को भेजकर उन्हें अपना भाई मान सकती हैं।
मोतीलाल नेहरू स्कूल: 35 वर्षों बाद सैनिकों को भेजेंगी राखी
मोतीलाल नेहरू स्कूल की प्रधानाचार्या श्रीमती संगीता सिंह ने इस अभियान के दौरान बेहद भावुक अनुभव साझा किया। उन्होंने बताया कि उनका कोई सगा भाई नहीं है और पिछले 35 वर्षों से उन्होंने किसी की कलाई पर राखी नहीं बांधी।
भारतीय डाक विभाग की इस पहल से प्रेरित होकर उन्होंने पहली बार देश की सीमाओं पर तैनात सैनिकों को स्पीड पोस्ट के माध्यम से राखी भेजने का संकल्प लिया। उन्होंने बताया कि उनके कई पूर्व छात्र आज भारतीय सेना में देश की सेवा कर रहे हैं, जिससे यह पहल उनके लिए और भी भावनात्मक बन गई है।
भारतीय संस्कृति, पर्यावरण और राष्ट्रभक्ति का संदेश
भारतीय डाक विभाग की यह अनूठी पहल केवल एक प्रतियोगिता नहीं, बल्कि बच्चों को भारतीय संस्कृति, पारिवारिक मूल्यों, पर्यावरण संरक्षण, हस्तनिर्मित वस्तुओं के महत्व और डाक सेवाओं से जोड़ने का सशक्त अभियान बनती जा रही है।
शहर के सभी प्रमुख विद्यालयों ने इस पहल को समाज के लिए अत्यंत सकारात्मक बताते हुए विद्यार्थियों से अधिक से अधिक संख्या में भाग लेने की अपील की है। विद्यालयों का मानना है कि बच्चों द्वारा अपने हाथों से बनाई गई राखियां जब भाइयों और देश की सीमाओं पर तैनात वीर सैनिकों तक पहुंचेंगी, तब यह केवल एक धागा नहीं बल्कि प्रेम, विश्वास, कृतज्ञता और राष्ट्रभक्ति का संदेश लेकर जाएगी।






