कोमल सिंह के बाद मैथिली ठाकुर, NDA के एक और विधायक ने बिहार विधानसभा में अपनी ही सरकार को घेरा

कोमल सिंह के बाद मैथिली ठाकुर, NDA के एक और विधायक ने बिहार विधानसभा में अपनी ही सरकार को घेरा

दरभंगा : बिहार विधानसभा के लिए पहली बार निर्वाचित एनडीए विधायक सदन में क्षेत्र की जनता की सुविधा के लिए दमदारी से अपनी बातों को रख रहे हैं। मुजफ्फरपुर के गायघाट से जदयू विधायक कोमल सिंह के बाद अब बीजेपी विधायक मैथिली ठाकुर ने भी अपनी ही सरकार को घेरते हुए स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं।
इसको सकारात्मक राजनीति के रूप में देखा जा रहा है।
बदहाल स्वास्थ्य केंद्र का मामला
शुक्रवार को बिहार विधानसभा में मैथिली ठाकुर ने अपने क्षेत्र तारडीह प्रखंड के कुरसों नदीयामी
विधायक ने कहा कि जिस अस्पताल भवन को केवल मरम्मत योग्य बताया गया है, वह पूरी तरह से जर्जर हो चुका है और उसे नए सिरे से पुनर्निर्माण की आवश्यकता है। उन्होंने बताया कि वर्तमान में वहां केवल एक आयुष चिकित्सक कार्यरत हैं, जबकि पहले दो एमबीबीएस डॉक्टर तैनात थे।
40 से 50 हजार लोगों को फायदा
मैथिली ठाकुर का कहना है कि यदि इस स्वास्थ्य केंद्र का समुचित विकास किया जाए, तो अलीनगर और घनश्यामपुर प्रखंड के करीब 40 से 50 हजार लोगों को बेहतर चिकित्सा सुविधा मिल सकती है।
पहली बार विधायक बनीं मैथिली ठाकुर जिस सक्रियता के साथ विधानसभा में अपनी बात रख रही हैं, वह चर्चा का विषय बना हुआ है। वह क्षेत्र की समस्याओं को मजबूती से उठाने के साथ ही अपनी ही सरकार से सवाल भी पूछ रही हैं।
मिथिलाक्षर केंद्र की मांग
इसके साथ ही मिथिला की भाषा, लिपि और संस्कृति के संरक्षण के लिए पंचायत स्तर पर ‘मिथिलाक्षर केंद्र’ की स्थापना की भी मांग रखी थी।मैथिली ठाकुर ने कहा कि जनस्वास्थ्य से कोई समझौता स्वीकार्य नहीं है। क्षेत्र की जनता को बेहतर, सुलभ और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराना उनकी सर्वोच्च प्राथमिकता है। इससे पहले गुरुवार को उन्होंने अपने क्षेत्र के लिए पिंक बस सेवा की मांग की थी।
कोमल ने उठाया था स्टेडियम का मुद्दा
गौरतलब है कि इससे पहले मुजफ्फरपुर की गायघाट सीट से नवनिर्वाचित जदयू विधायक कोमल सिंह ने भी बिहार विधानसभा के बजट सत्र के दौरान स्टेडियम निर्माण के मुद्दे पर अपनी ही सरकार को घेरकर सबको चौंका दिया था।
उन्होंने सदन में खेल विभाग की रिपोर्ट को गलत बताते हुए कहा था कि जारंग और अथवारा पंचायत में जिन स्थानों को स्टेडियम बताया गया है, वे वास्तव में पुराने स्कूल मैदान हैं, जहां कोई बुनियादी सुविधा मौजूद नहीं है।
जांच कराने की मांग
कोमल सिंह ने इस मामले में उच्चस्तरीय जांच की मांग करते हुए खेल मंत्री श्रेयसी सिंह से कागजी रिपोर्ट और जमीनी हकीकत में अंतर की जांच कराने की अपील की थी। इस मुद्दे पर सदन में खेल मंत्री ने जीओ-टैगिंग और तस्वीरों के आधार पर काम होने का दावा किया, जबकि कोमल सिंह ने खुद क्षेत्र से होने का हवाला देते हुए नए स्टेडियम के निर्माण से इनकार किया था।

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