*सीएसआईआर-राष्ट्रीय धातुकर्म प्रयोगशाला ने मनाया अपना 75वां स्थापना दिवस*

*सीएसआईआर-राष्ट्रीय धातुकर्म प्रयोगशाला ने मनाया अपना 75वां स्थापना दिवस

 

सीएसआईआर-राष्ट्रीय धातुकर्म प्रयोगशाला (सीएसआईआर–एनएमएल) ने आज अपने प्लेटिनम जुबिली स्थापना दिवस का उत्सव मनाया। वर्ष 1950 में राष्ट्र को समर्पित सीएसआईआर–एनएमएल, परिषद के प्रथम महानिदेशक और दूरदर्शी वैज्ञानिक सर शांति स्वरूप भटनागर द्वारा स्थापित शुरुआती प्रयोगशालाओं में से एक है। इस अवसर पर वर्तमान महानिदेशक और इस पद को संभालने वाली पहली महिला, *डॉ. एन. कलैसेल्वी* मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित थीं। उनके साथ सीएसआईआर–एनएमएल के निदेशक, डॉ. संदीप घोष चौधुरी, डॉ. एन. मुर्मू, निदेशक, सीएमईआरआई (सेंट्रल मैकेनिकल इंजीनियरिंग रिसर्च इंस्टीट्यूट), दुर्गापुर तथा श्री एस. के. झा, पूर्व अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक, मिधानी भी समारोह में शामिल हुए।

 

*डॉ. एन. कलैसेल्वी* ने भारत सरकार के राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन के अंतर्गत परीक्षण सुविधाओं और अवसंरचना की आधारशिला रखी। इस मिशन का उद्देश्य देश में स्वदेशी हाइड्रोजन उत्पादन को बढ़ावा देना है। ये परीक्षण सुविधाएं अपने प्रकार की देश में पहली होंगी। 26 नवंबर को भारत में संविधान दिवस के रूप में मनाया जाता है, क्योंकि 26 नवंबर 1949 को भारत की संविधान सभा ने संविधान को अंगीकृत किया था। इस अवसर पर डॉ. कलैसेल्वी ने संविधान की प्रस्तावना का वाचन किया।

 

सीएसआईआर–एनएमएल के निदेशक, *डॉ. संदीप घोष चौधुरी* ने इस महत्वपूर्ण अवसर पर सभी विशिष्ट अतिथियों का स्वागत किया। अपने स्वागत भाषण में निदेशक डॉ. संदीप घोष चौधरी ने कहा कि सीएसआईआर–एनएमएल की स्थापना एक स्पष्ट उद्देश्य के साथ की गई थी—भारत की धातुकर्म अनुसंधान क्षमताओं को सुदृढ़ करना, औद्योगिक विकास को समर्थन देना, और राष्ट्र महत्व की वैज्ञानिक चुनौतियों के समाधान प्रदान करना। पिछले पचहत्तर वर्षों में एनएमएल ने इस उद्देश्‍य को उत्कृष्टता के साथ निभाया है। हमारे वैज्ञानिकों, तकनीशियनों, विद्यार्थियों और कर्मचारियों ने खनन, इस्पात, एल्यूमिनियम, एयरोस्पेस, सामरिक धातुओं, ऊर्जा, पर्यावरणीय स्थिरता और परिपत्र अर्थव्यवस्था जैसे विविध क्षेत्रों में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। प्रमुख वैज्ञानिक एवं प्रौद्योगिकीय उपलब्धियाँ इस प्रकार हैं:

1. एडवांस्ड अल्ट्रा-सुपरक्रिटिकल (AUSC) पावर प्लांट सामग्री

2. बैटरी-से-बैटरी रीसाइक्लिंग तकनीक

3. मैग्नीशियम उत्पादन तकनीक

4. नए स्टील ग्रेड का विकास

5. नए एल्यूमिनियम मिश्रधातु

6. रेड मड उपयोगीकरण तकनीक

7. जिंक ड्रॉस से सिल्वर निष्कर्षण

8. पुनर्चक्रित पदार्थों से रेयर अर्थ तत्वों का निष्कर्षण

 

ये उपलब्धियाँ एनएमएल के अनुसंधान के व्यापक दायरे को दर्शाती हैं—संसाधन निष्कर्षण से लेकर उन्नत सामग्री तक, रीसाइक्लिंग तकनीक से लेकर सामरिक धातुकर्म तक—जो उभरती राष्ट्रीय प्राथमिकताओं में हमारी निरंतर प्रासंगिकता को सुदृढ़ करती हैं।

 

कार्यक्रम का उद्घाटन करते हुए, *डॉ. (श्रीमती) एन. कलैसेल्वी* ने प्रयोगशाला को उसकी उपलब्धियों के लिए बधाई दी और हर चुनौती को स्वदेशी तकनीकों के विकास के अवसर के रूप में देखने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि सीएसआईआर के हस्तक्षेपों ने हमेशा वैश्विक मंच पर भारत की स्थिति को सुदृढ़ किया है। उन्होंने आगे भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप तकनीकों के विकास और स्टार्टअप्स के साथ सहयोग को आत्मनिर्भर भारत और विकसित भारत 2047 के लक्ष्यों की प्राप्ति के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण बताया।

 

*श्री एस. के. झा* ने प्रयोगशाला को बधाई देते हुए कहा कि सीएसआईआर–एनएमएल उन चुनिंदा प्रयोगशालाओं में से एक है जो तकनीकों को न केवल प्रयोगशाला स्तर पर विकसित करती है, बल्कि पायलट स्तर पर उनका प्रदर्शन भी करती है, जिससे उद्योगों का भरोसा बढ़ता है। डॉ. एन. मुर्मू ने सीएसआईआर प्रयोगशालाओं के बीच सहयोग की आवश्यकता पर बल दिया, जो देश के समग्र विकास के लिए अत्यंत आवश्यक है।

 

इस अवसर पर सीएसआईआर–एनएमएल ने उद्योगों के साथ कई समझौता ज्ञापनों (MoUs) का आदान-प्रदान किया तथा AcSIR के पूर्व छात्रों को सम्मानित किया। सर्वश्रेष्ठ शोधपत्र, सर्वश्रेष्ठ विकसित तकनीक तथा सर्वश्रेष्ठ कर्मचारी के लिए इन-हाउस पुरस्कार प्रदान किए गए। कर्मचारियों के प्रतिभाशाली बच्चों को उत्कृष्ट शैक्षणिक प्रदर्शन के लिए सीएसआईआर के महानिदेशक द्वारा छात्रवृत्ति पुरस्कार भी प्रदान किए गए। सीएसआईआर-एनएमएल के *श्री जयशंकर शरण*, प्रशासन नियंत्रक ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया और मुख्य अतिथि सहित सभी प्रतिभागियों के प्रति आभार व्यक्त किया।

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