*बांधडीह मनरेगा महाघोटाला: करोड़ों की निकासी, काम अधूरा; JE और पंचायत सचिव पर गिरेगी गाज!
« सोशल ऑडिट में खुली पोल, 262 योजनाओं में खामियां; लाखों की रिकवरी प्रक्रिया शुरू
*देवघर से कृष्णा गोस्वामी एवं मुन्ना कापरी की रिपोर्ट*
देवघर। जिले के पालोजोरी प्रखंड की बांधडीह पंचायत में मनरेगा योजनाओं में अब तक की सबसे बड़ी अनियमितता सामने आई है। सामाजिक अंकेक्षण (Social Audit) टीम की रिपोर्ट ने चौंकाने वाले खुलासे किए हैं, जिनमें करोड़ों रुपए की निकासी के बावजूद जमीनी स्तर पर काम अधूरा पाया गया। ऑडिट टीम ने 262 योजनाओं की जांच की, जिसमें 185 योजनाएँ अपूर्ण मिलीं। जबकि सामाजिक अंकेक्षण के नियमों के अनुरूप जनसुनवाई का कार्यक्रम पंचायत भवन या ग्राम स्तर पर ग्रामीणों की मौजूदगी में होनी चाहिए। जो की बांधडीह पंचायत का जनसुनवाई कार्यक्रम पंचायत भवन या ग्रामीण स्तरीय पर ना करके पंचायत भवन से करीब 500 मीटर की दूरी वाली सुदूरवर्ती जगहों पर ले जाकर जनसुनवाई कार्यक्रम आयोजित की गई। जिससे पंचायत के ग्रामीणों का इसका पता चल सके।
🔴 दस्तावेजों का गबन और अधिक निकासी
ऑडिट रिपोर्ट के अनुसार, वित्तीय अनियमितता चरम पर थी:
* अधिक निकासी: 61 योजनाओं में काम से अधिक राशि निकाल ली गई।
* रिकॉर्ड गायब: 40 योजनाओं से मापी पुस्तिका (Measurement Book) और 27 संचिकाएँ (फाइलें) गायब मिलीं। जूरी सदस्यों ने इसे लाखों की राशि के गबन का स्पष्ट मामला बताया है।
* वित्तीय वर्ष 2024-25 की 39-40 योजनाओं में से मात्र 14 पूर्ण पाई गईं, और ₹75,98,101 की राशि के सही खर्च का कोई ब्योरा नहीं मिला।
🔨 मौके पर ही कार्रवाई: JE और सचिव पर फाइन
ऑडिट टीम के जूरी मेंबर्स ने अनियमितताओं को देखते हुए मौके पर ही कार्रवाई की:
* आर्थिक दंड: संबंधित कनिष्ठ अभियंता (JE) और पंचायत सचिव पर आर्थिक दंड (फाइन) लगाया गया।
* वसूली का निर्देश: प्रखंड कार्यालय को गबन की गई राशि की तत्काल रिकवरी (वसूली) प्रक्रिया शुरू करने का निर्देश दिया गया है। अपूर्ण योजनाओं को तुरंत पूरा करने का आदेश भी दिया गया है।
❌ नियमों की धज्जियाँ: जनसुनवाई भी सवालों के घेरे में
ऑडिट प्रक्रिया में भी गंभीर उल्लंघन पाया गया:
* सामाजिक अंकेक्षण के नियमों के विपरीत, जनसुनवाई कार्यक्रम को पंचायत भवन से 500 मीटर दूर आयोजित किया गया।
* ग्रामीणों और मजदूरों को बिना बुलाए जनसुनवाई कर दी गई, जो सीधे-सीधे ऑडिट प्रक्रिया का उल्लंघन है।
📢 उच्च स्तरीय जांच की मांग
ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि इतनी बड़ी गड़बड़ी बिना अधिकारियों की मिलीभगत के असंभव है। कई योजनाओं में साइट पर काम न होने के बावजूद कागज़ पर उन्हें पूर्ण दिखाया गया है। ग्रामीणों ने मामले की उच्च स्तरीय जांच की मांग की है।
> “जब तक सरकार ऐसे गतिविधियों पर कड़ा रुख नहीं अपनाती है एवं कोई उच्च स्तरीय जाँच एजेंसी इनको अपने संज्ञान में लेकर जाँच करे तो कई अहम चौकाने वाले खुलासे होंगे।




