30वां संविधान संशोधन स्वार्थी कदमः शिल्पी नेहा तिर्की, सूर हासदा एनकाउंटर पर सीबीआई जांच की मांग
रांची : झारखंड विधानसभा परिसर में 130वें संविधान संशोधन विधेयक को लेकर सत्ता और विपक्ष आमने-सामने आ गए। इंडिया गठबंधन ने केंद्र सरकार पर आरोप लगाया कि वह अपने स्वार्थ के लिए संविधान में बदलाव कर रही है।
विधेयक के अनुसार, यदि कोई जनप्रतिनिधि 30 दिनों तक जेल में रहता है तो उसे 31वें दिन पद छोड़ना होगा। इस पर कांग्रेस विधायक शिल्पी नेहा तिर्की ने कहा कि यह संशोधन लोकतांत्रिक व्यवस्था पर सीधा हमला है। उन्होंने कहा कि “अक्यूज्ड और कन्विक्टेड के बीच का अंतर खत्म कर दिया जा रहा है। जब तक किसी पर आरोप सिद्ध न हो, तब तक उसे दोषी नहीं माना जा सकता, लेकिन इस संशोधन से चुने हुए प्रतिनिधियों को अन्यायपूर्ण तरीके से हटाया जा सकेगा।
उन्होंने मोदी सरकार पर विपक्षी नेताओं को निशाना बनाने का भी आरोप लगाया। तिर्की ने कहा कि “सीबीआई और ईडी जैसी एजेंसियों का दुरुपयोग करके विपक्षी नेताओं को परेशान किया जा रहा है। हमारे मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन का मामला इसका उदाहरण है। कुछ भी साबित नहीं हुआ, फिर भी उन्हें जेल भेजा गया।”
वहीं बीजेपी सूर हासदा एनकाउंटर मामले में सीबीआई जांच की मांग कर रही है। इस पर शिल्पी नेहा तिर्की ने कहा कि किसी भी एनकाउंटर की निष्पक्ष जांच जरूरी है। उन्होंने कहा कि सूर हासदा अपराधी नहीं बल्कि राजनीतिक कार्यकर्ता थे। तीन बार चुनाव लड़ चुके हासदा की गिरफ्तारी के बाद पुलिस कस्टडी में हत्या कर दी गई। तिर्की ने जोर देकर कहा कि यदि सीबीआई जांच हो तो सच सामने आ जाएगा।






