जमशेदपुर स्थित सीएसआईआर-राष्ट्रीय धातुकर्म प्रयोगशाला (सीएसआईआर-एनएमएल) अपना प्लेटिनम जुबली वर्ष मना रही है।

जमशेदपुर स्थित सीएसआईआर-राष्ट्रीय धातुकर्म प्रयोगशाला (सीएसआईआर-एनएमएल) अपना प्लेटिनम जुबली वर्ष मना रही है। इस प्रयोगशाला का औपचारिक उद्घाटन पंडित जवाहरलाल नेहरू ने 26 नवंबर 1950 को किया था। इस अवसर पर सीएसआईआर-एनएमएल प्लेटिनम जुबली व्याख्यान श्रृंखला का आयोजन कर रही है, जिसमें प्रख्यात हस्तियों द्वारा व्याख्यान दिए जाते हैं। 2 जुलाई 2025 को सीएसआईआर-एनएमएल ऑडिटोरियम में आयोजित 5वां प्लेटिनम जुबली व्याख्यान को प्रतिष्ठित वक्ता, भारत सरकार के नीति आयोग के सदस्य, पद्म भूषण डॉ. विजय कुमार सारस्वत ने दिया। डॉ. सारस्वत ने “भारत के सामरिक भविष्य के लिए महत्वपूर्ण सामग्री” शीर्षक विषय पर एक ज्ञानवर्धक व्याख्यान दिया। कार्यक्रम की शुरुआत सीएसआईआर-एनएमएल के निदेशक डॉ. संदीप घोष चौधरी के स्वागत भाषण से हुई। डॉ. सारस्वत ने सीएसआईआर-एनएमएल को उसकी 75वीं वर्षगांठ पर हार्दिक बधाई दी और इस क्षेत्र में इसके महत्वपूर्ण योगदान को सराहा। अपने व्याख्यान में डॉ. सारस्वत ने भारत के रणनीतिक और तकनीकी भविष्य को आकार देने में महत्वपूर्ण सामग्रियों की अपरिहार्य भूमिका पर जोर दिया। ऐतिहासिक चुनौतियों पर विचार करते हुए, उन्होंने रणनीतिक सामग्रियों की कमी और विकसित भारत के संदर्भ में उनके महत्व पर ध्यान दिलाया। डॉ. सारस्वत ने एक व्यापक वैश्विक परिप्रेक्ष्य प्रदान किया, जिसमें बताया गया कि इलेक्ट्रिक वाहन बैटरियों और पवन टरबाइन घटकों का अधिकांश हिस्सा महत्वपूर्ण सामग्रियों पर निर्भर करता है, जो टिकाऊ और उन्नत प्रौद्योगिकियों के लिए उनके अहमियत को साबित करता है।

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