पोटका वीरों की धरती है जहां शहीद दुसा -जुगल दोनों भाइयों ने 1832- 33 के दशक में अंग्रेजों द्वारा महिलाओं के ऊपर अत्याचार,नील की खेती एवं मालगुजारी के खिलाफ तीर धनुष उठा लिया था। पत्थलगड़ी के द्वारा टीम बनाकर अंग्रेजों के छक्के छुड़ा दिए थे
पोटका : 1832 में अंग्रेजों द्वारा किसानों से मालगुजारी एवं जबरदस्ती नील की खेती तथा महिलाओं के ऊपर अत्याचार का सिलसिला बढ़ता ही जा रहा था वही इस दौरान रसूनचोपा के सारसे बुरुहातु में 1790 में जन्मे दो सगे भाई वीर शहीद दुसा – जुगल ने अंग्रेजों की दमनकारी नीति के खिलाफ तीर धनुष उठा लिया था। इसी दौरान अंग्रेजों की अत्याचार के खिलाफ एक टीम बनाकर लड़ाई लड़ रहे थे वहीं अंग्रेजों का सारसे बुरुहातु होकर आना-जाना होता था। इस दौरान इन दोनों भाइयों ने खेत में पत्थलगड़ी कर पत्थरों के पीछे आड़ में छुपकर तीर धनुष चलाया करते थे वही अंग्रेजों का शिकार करना प्रारंभ हो गया था अंग्रेज इन दोनों भाइयों की अत्याचार से परेशान हो गए थे वहीं हिमांशु सरदार ने बताया कि दोनों भाइयों के संबंध में सूचना देने वाले के लिए अंग्रेजो द्वारा इनाम घोषित कर चुके थे वहीं 1832- 33 में इन दोनों भाइयों ने अंग्रेजों के नाकों दम कर रखा था। इन दोनों भाइयों का कहना था कि जबरदस्ती नील की खेती एवं मालगुजारी तथा महिलाओं के अत्याचार से अगर मुक्त होना है तो अंग्रेजों को देश से भागना है। इसी को लेकर आंदोलन लगातार चलता रहा इस बीच कुछ गद्दारों द्वारा अंग्रेजों को दोनों भाइयों के संबंध में सूचना दे दी जिसके बाद अंग्रेजों द्वारा इन्हें पकड़ लिया गया, इसके बाद इन दोनों भाइयों को सारसे बुरुहातु से बैलगाड़ी में बैल की जगह इन दोनों भाइयों को जोत कर देवली चौक लाया गया जहां इन्हें फांसी दे दी गई, जिसको लेकर देवली चौक में इन दोनों भाइयों के नाम से दुसा- जुगल चौक के नाम से जाना जाता है। साथ ही साथ गांव के खेतों में पत्थलगड़ी को माघ महीने में गांव के लोग पूजा अर्चना कर उत्सव के रूप में मनाते आ रहे हैं वही ग्रामीणों का कहना है कि वीर शहीद दुसा जुगल दोनों भाई गांव के लिए प्रेरणा स्रोत है। गांव के हरिश्चंद्र सरदार एवं हिमांशु सरदार ने बताया कि दोनों भाई लगातार अंग्रेजों के खिलाफ लड़ते रहे एवं महिलाओं के ऊपर हो रहे अत्याचार मालगुजारी एवं नील की खेती के कारण दोनों भाइयों ने अंग्रेजों के खिलाफ धनुष उठा लिए थे वही इन्होंने मांग कि की पत्थर गड़ी में लगे पत्थर को राष्ट्रीय धरोहर घोषित किया जाए जहां दोनों भाइयों ने छिपकर अंग्रेजों के नाखून कर रखा था।





