जमशेदपुर । सामाजिक संस्था जन सत्याग्रह के द्वारा आज उपायुक्त महोदय, वरीय पुलिस अधिक्षक, अनुमण्डल पदाधिकारी धालभूम को जमशेदपुर के बहुत से जगहों पर मेन रोड के किनारे बड़ी गाड़िया का पार्किंग आम बात सी हो गयी है। महोदय कई गाड़िया (Bulkar,Haiwa) बिना किसी आदेश के नो इंट्री के समय भी खुले आम चल रहीं है जिससे लगातार दुर्घटना घट रही हैं। कृप्या कर इसपर कठोरता से कानून संवत लगातार उचित कार्यवाई करने को ले कर मांग पत्र शौपा गया हैं।
महाशय,
उपरोक्त विषय के सन्दर्भ में निवेदन पूर्वक कहना है कि निम्नलिखित जगहों पर बड़ी गाड़ियों की पार्किंग प्रायः हर रोज देखने को मिलता है जिसपर कभी-कभी कुछ कार्यवाई की जाती है फिर पता नहीं क्यों बंद कर दी जाती हैं। कृपया इनसब जगहों की उचित जाँच कर क़ानूनी कार्यवाई लागातार करने का कष्ट करे:-
1. जमशेदपुर के बर्मामाइंस स्थित टैक्सी स्टैंड (दुर्गा पूजा मैदान) से ट्यूब कम्पनी तक।
2. जमशेदपुर, बर्मामाइंस के ट्यूब कम्पनी से केबुल रोड गोलमुरी तक।
3. जमशेदपुर, बर्मामाइंस के स्टैंड (दुर्गा पूजा मैदान) से ईस्टप्लांट बस्ती तक।
4. जमशेदपुर, टेल्को के DVC मोड़ से जेम्को होते हुए टाटा पॉवर गेट तक।
5. जमशेदपुर, गोलमुरी के साकची-स्टेशन मेन रोड किनारे R.D.Tata गोलचक्कर पेट्रोल पंप के पास से माउलबेड़ा तक।
महोदय, इनसब जगहों पर मेन रोड के किनारे बड़ी गाड़िया का पार्किंग आम बात हो गयी है। जिससे इस रोड पर छोटी-मोटी दुर्घटना आम बात सी हो गयी है एवं बहुत सारे हेवी व्हीकल में ना तो दो ड्राइवर है और ना ही खलासी होता है इसकी जाँच करवाना एवं पालन कड़ाई से करवाई जाए। जिस प्रकार से दो पहिया वाहनों की जाँच कड़ाई से की जा जाती है सभी कागज की जाँच होती है वैसे ही क्यों नहीं हेवी व्हीकल की भी होती है क्या हेवी व्हीकल पर कोई कानून लागू नहीं होती है।
महोदय कई गाड़िया (Bulkar,Haiwa) बिना किसी आदेश के नो इंट्री के समय भी खुले आम चल रहीं है जिससे लगातार दुर्घटना घट रही हैं। कृप्या कर इसपर कठोरता से उचित कारवाई करे। जिससे बहुत सारी दुर्घटनाओं से बचा जा सकता है।
महोदय इसके पूर्व भी हमलोगों ने कई बार मांग पत्र शोपा था जिस पर एक दो दिन तो कार्यवाई होती है और फिर किसी दवाब में बंद कर दिया जाता है।
महोदय कुछ अच्छा हो, इसके लिए यह जरुरी है, कि कुछ अच्छा किया जाए। आपके पास पहल आरंभ करने का सामर्थ्य है। संभवतः लक्ष्य तक ना भी पंहुचा पाए लेकिन कुछ बंद दरवाजे तो जरुर खोल ही सकते है। कोई भी कानून चाहे वह कितना भी कड़ा क्यों ना हो, उसे मनवाने वालो के समर्पण के अभाव में अपने उद्देश्यों को प्राप्त नहीं कर सकता है।






