आखान यात्रा के दिन पेट रोग निवारण में चिड़ी दाग का महत्व

आखान यात्रा के दिन पेट रोग निवारण में चिड़ी दाग का महत्व

सरायकेला – सरायकेला जिला के विभिन्न गांव में आखान यात्रा मनाया जा रहा है कहीं लोग आखान यात्रा देवी देवताओं कापूजा पाठ करके अपने कार्यक्रम को शुभारंभ करते हैं तो कहीं-कहीं रोग निवारण के लिए विभिन्न प्रकार के उपकरणों का प्रयोग करके आखान यात्रा का शुभारंभ करते हैं। ऐसे ही सीनी के रायडीह गांव में देखा गया ।

राजीव महतो ने बताया की चिड़ी दाग सूरज उठने से पहले आग पर लोहे का हसुआ को गर्म किया जाता है तथा पेट पर कई जगह पर गरम लोहे से पेट में दागा जाता है जिससे उनका कहना है ऐसा चिड़ी दाग लेने पर की पेट संबंधी कई बीमारियों का निवारण हो जाता है यह परंपरा हमारे पूर्वजों में वर्षों से चली आ रही है।

Leave a Comment

सबसे ज्यादा पड़ गई