वर्ल्ड हेल्थ पार्टनर के मनोविशेषज्ञ ने सैकड़ों छात्र-छात्राओं को किया मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूक।

बेहतर मानसिक स्वास्थ्य को लेकर सामाजिक संस्था नाम्या स्माइल फाउंडेशन का ‘माही’ अभियान पहुंचा जमशेदपुर के लोयोला स्कूल, वर्ल्ड हेल्थ पार्टनर के मनोविशेषज्ञ ने सैकड़ों छात्र-छात्राओं को किया मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूक।

जमशेदपुर। मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं को इस दशक के लिए बड़ी चुनौती के रूप में देखा जा रहा है एवं आजकल के युवाओं में चिंता-तनाव और अवसाद के मामले भी तेजी से बढ़ रहे हैं। युवाओं में बढ़ रही इस गंभीर समस्या के मद्देनजर शहर की सामाजिक संस्था नाम्या स्माइल फाउंडेशन एवं वर्ल्ड हेल्थ पार्टनर के संयुक्त तत्वावधान में ‘माही’ (मेंटल अवेसमनेस एंड हेल्थ इनिशिएटिव) अभियान शुरुआत की गयी है। सोमवार को संस्था का यह अभियान जमशेदपुर स्थित लोयोला स्कूल पहुंचा। जहां माही (MAHI) अभियान के तहत नाम्या स्माइल फाउंडेशन के संस्थापक सह पूर्व विधायक कुणाल षाड़ंगी एवं लोयोला स्कूल के प्रिंसिपल फादर विनोद फर्नांडिस, वाईस प्रिंसिपल जयन्थी शेषदरी एवं अन्य ने संयुक्त रूप से इस अभियान की शुरुआत की। इस दौरान अनेकों योजनाओं में सरकार के साथ काम कर रहे वर्ल्ड हेल्थ पार्टनर के मनोविशेषज्ञ ने लोयोला स्कूल के ढाई सौ से अधिक छात्र-छात्राओं को मानसिक स्वास्थ्य की समस्याओं के प्रति विस्तृत जानकारी देकर उन्हें मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूक किया।

इस अवसर पर नाम्या स्माइल फाउंडेशन के सदस्य रिशु रंजन ने बताया कि बढ़ती मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं के बारे में युवाओं को जागरूक करने और इस खतरे को कम करने के उद्देश्य से संस्था नाम्या स्माइल फाउंडेशन एवं वर्ल्ड हेल्थ पार्टनर के संयुक्त तत्वावधान में मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता अभियान की शुरुआत की गई है। इस अभियान के अंतर्गत केंद्र एवं राज्य सरकार के टीबी उन्मूलन एवं कई अन्य कार्यक्रमों से जुड़े वर्ल्ड हेल्थ पार्टनर के मनोविशेषज्ञ द्वारा जिले के सभी बड़े शिक्षण संस्थानों में युवाओं को मानसिक स्वास्थ्य की समस्याओं एवं इससे बचाव हेतु जागरूक किया जा रहा है।

वहीं, कार्यक्रम में संस्था के संस्थापक कुणाल षाडंगी ने कहा कि मन को स्वस्थ रखे बिना स्वस्थ तन की कल्पना करना बेमानी होगी, और इससे बड़ी बेमानी होगी मानसिक स्वास्थ्य को एक दायरे में बांध कर रखना। आज बढ़ते मानसिक समस्याओं के मद्देनजर स्वास्थ्य समस्या के साथ मेंटल हेल्थ समस्याओं के प्रति भी गंभीर होने की जरूरत है। देश के सभी बच्चे, उनके माता-पिता, शिक्षक, प्रशासन, नीति निर्माताओं और कानून व्यवस्था को मानसिक स्वास्थ्य की अहमियत के बारे में सोचने और इस दिशा में सार्थक प्रयास करने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया का अति-उपयोग और तुलनात्मक व्यवहार के कारण भी युवा वर्ग अवसादग्रस्त हो रहे हैं। इसके साथ ही, शहर में आत्महत्या के मामले में भी वृद्धि देखी जा रही है। कहा कि मानसिक स्वास्थ्य को लेकर समाज में व्याप्त भ्रम औऱ स्टिग्मा के चलते लोग अपनी समस्याएं दूसरों के साथ शेयर नहीं करना चाहते, जागरूकता के आभाव के कारण इस तरह की सोच बड़ी चुनौती साबित होती है, इसमें समाज को संवेदनशील होने की जरूरत है।

कार्यशाला के दौरान छात्र-छात्राओं को संबोधित करते हुए मेंटल हेल्थ एक्सपर्ट निमिषा रानपारा ने बताया कि ‘हमारे दिमाग में हमेशा विचार चलते रहते हैं। ये थॉट्स ही हैं जो हमें थ्रेड्स भी दिलाते हैं। जैसे बच्चों को अपने अकेडमिक्स या करियर में अथवा और कुछ अच्छा करना है, इस प्रकार के निरंतर विचार उन्हें स्ट्रैस की तरफ ले जाते हैं। हम इस पर जागरूकता पैदा करके ही इससे निजात पा सकते हैं।

इससे पहले, लोयोला स्कूल के प्रिंसिपल फादर विनोद फर्नांडिस ने अतिथियों को पुष्पगुच्छ भेंटकर स्वागत किया। उन्होंने संस्था द्वारा चलाये जा रहे मुहिम की सराहना करते हुए इसे छात्र-छात्राओं के लिए अत्यंत उपयोगी बताया।

इस मौके पर लोयोला स्कूल के प्रिंसिपल फादर विनोद फर्नांडिस, वाईस प्रिंसिपल जयन्थी शेषदरी, सेफ क्लब के संचिता घोष, जे के झा, किरण कुमारी, डेल पस्सगने, ऋचा मिश्रा समेत संस्था के निर्मल कुमार, धवल सेठ, पूर्णेंदु आचार्य, प्रशांत कुमार व अन्य छात्र-छात्राएं मौजूद रहे।

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