बी एस एस आर यूनियन जमशेदपुर इकाई के सदस्य जिला आयुक्त कार्यालय के समीप धरना प्रदर्शन किया और केंद्रीय श्रम मंत्री को ज्ञापन सौंपा।

बी एस एस आर यूनियन जमशेदपुर इकाई के सदस्य जिला आयुक्त कार्यालय के समीप धरना प्रदर्शन किया और केंद्रीय श्रम मंत्री को ज्ञापन सौंपा।

देश के मजदूर वर्ग और दवा उद्योग में कार्यरत प्रोत्सहन कर्मियों का बड़ती हुई छटनी – जुल्म वेतन में कटौती- शोषण के खिलाफ अखिल भारतीय विरोध दिवस 19 जुलाई एन्टी विक्टिमाइजेसन डे के रूप से मनाया और बी एस एस आर यूनियन जमशेदपुर के करीब 300 साथिओ धरना स्थल पर बैठा। नौकरी खोये हुए कई लोगों अपना परिवार के साथ नारा लगाते हुए दिखे।

संगठन के राष्ट्रिय कार्यकारीनि सदस्य के डी प्रताप ने कहा- वैसे तो केंद्र सरकार की मजदूर विरोधी कार्पोरेट परस्त नीति के कारण देश मे बेरोजगारी बड़ी है और देश का युवा परेशान हैं। दवा उद्योग में भारत में काम कर रही बहुराष्ट्रीय कंपनियों ने व्यवसाय का पुनर्गठन के नाम पर फील्ड वर्कर्स की छंटनी की है। बायर से शुरू होकर, एमएसडी, ग्लैक्सो, नोवार्टिस, सनोफी और हाल ही में फाइजर ने देश भर में काम कर रहे कई सेल्स प्रमोशन कर्मचारियों की सेवा समाप्त कर दी। ये बहुराष्ट्रीय कंपनियां जो कोरोना काल मे रेकॉर्ड मुनाफा कमाया वह फ्रैंचाइजी मार्केटिंग द्वारा और मुनाफा कमाने का प्लान बना लिया। यही सारे कंपनी और दवाई लॉबी के दबाव में सरकार पिछले महिना मे 850 दवाई का दाम में 10% तक का इजाफा किया।

इन बड़े बड़े कंपनी के प्रतिस्पर्धा के चलते भारतीय छोटा मझौले दवा कंपनियां विलय के माध्यम से मौजूदा सेवा शर्तों का बड़े पैमाने पर उल्लंघन कर रही है। हाल के दिनों में भी यह देखा गया है कि कुछ वित्तीय संस्थान खरीदारी की होड़ में हैं और अधिग्रहण तेजी से हो रहे हैं। बीएसवी (भारत सीरम ) द्वारा टीटीके के उत्पादों को लेने के बाद, नई कंपनी में नौकरी पाने वाले फील्डवर्कर्स को अपमानजनक सेवा शर्तों को स्वीकार करने के लिए मजबूर किया और देश की कानूनों का उल्लंघन कर 2000 से अधिक फील्डवर्कर्स की छंटनी की है। फाइजर प्रबंधन भी 200 से ज्यादा लोगों का नौकरी समाप्त किया।

इसी तरह अल्बर्ट डेविड प्रबंधन, प्रोत्सहन कर्मी पर अमनवीय कामकाजी परिस्थितियों को लागू करने का कोशिश किया और बिरोध करने पर, छटनी, तवादला, वेतन में कटौती और फील्ड वर्कर्स को एलओपी (लीव विदाउट पे) करने का काम किया

हिमालय वेलनेस कंपनी ने जीउस डिवीजन के संचालन को बंद कर दिया और अब सभी जघन्य रणनीति का सहारा लेकर फील्डवर्कर्स को आतंकित करने पर आमादा है। विरोध कर रहे फील्ड वर्कर को धमकियों, तबादलों के रूप में उत्पीड़न, बर्खास्तगी, वेतन में कटौती का सामना करना पड़ रहा है। आश्चर्य की बात है की सरकार की नाक के तले

कानूनी प्रावधानों का उल्लंघन किया जा रहा है।

एएफडी प्रबंधन भी पूरे देश में ट्रेड यूनियन कार्यकर्ताओं को खत्म करने के लिए सभी तंत्रों का सहारा लिया और न्यायाधिकरणों में श्रम

विवादों के लंबित रहने के दौरान प्रबंधन ने फील्ड वर्कर्स को स्थानांतरित कर दिया। विभिन्न कंपनियों में होने वाली ये सभी घटनाएं आपस में जुड़ी हुई हैं और पूरे उद्योग का लक्ष्य है की श्रम कानूनों में लचीलेपन का वातावरण

बनाना और ज्यादा से ज्यादा मुनाफा के लिये फ्रैंचाइज़ी और ठेका कर्मी द्वारा फील्डवर्कर्स के संगठित वर्ग को हटाकर बंधवा मजदूर में तब्दिल करना और अपमान जनक सेवा शर्त पर काम कराना।

सचिव बिनय कुमार का नेतृत्व मे एक प्रतिनिधिमण्डल ने माननीय उपयुक्त महोदय के माध्यम से माननीय श्रम मंत्री केंद्र सरकार को ज्ञापन सौंपा और यह सारे मामले में ध्यान आकृष्ट किया।

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