MMDR (Mines and Minerals (Development and Regulation) Act) को लेकर केंद्र और राज्य सरकार के बीच अधिकार, राजस्व और खनिज संसाधनों से जुड़े मुद्दों पर राजनीतिक टकराव बढ़ता नजर आ रहा है। इसी बीच भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने झारखंड में खनिज चोरी और अवैध खनन को लेकर राज्य सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं।
निशिकांत दुबे ने दावा किया कि झारखंड में बड़े पैमाने पर खनिजों की चोरी हो रही है और देश में खनिज चोरी के मामले में झारखंड की स्थिति बेहद गंभीर है। उनके बयान के बाद राज्य की राजनीति में इस मुद्दे ने तूल पकड़ लिया है।
MMDR को लेकर केंद्र और राज्य आमने-सामने
MMDR Act के तहत देश में खनिजों के विकास और विनियमन से जुड़े कई महत्वपूर्ण प्रावधान हैं। खनिज संपदा वाले राज्यों में इसके प्रावधानों का सीधा संबंध खनन गतिविधियों, रॉयल्टी, खनिज परिवहन और राज्य के राजस्व से भी जुड़ता है।
इसी वजह से MMDR से जुड़े किसी भी बदलाव या इसके प्रावधानों के इस्तेमाल को लेकर केंद्र और राज्य के बीच राजनीतिक बहस तेज हो सकती है। झारखंड जैसे खनिज बहुल राज्य के लिए यह मुद्दा विशेष रूप से महत्वपूर्ण माना जाता है।
खनिज चोरी के आरोपों पर गरमाई राजनीति
निशिकांत दुबे के आरोपों के बाद अवैध खनन और खनिज परिवहन को लेकर राज्य सरकार पर सवाल उठ रहे हैं। उनका कहना है कि राज्य में खनिज संपदा की बड़े पैमाने पर चोरी से सरकारी राजस्व को नुकसान हो रहा है।
झारखंड में कोयला, लौह अयस्क, बॉक्साइट, अभ्रक समेत कई महत्वपूर्ण खनिज पाए जाते हैं। राज्य की अर्थव्यवस्था में खनन क्षेत्र की महत्वपूर्ण भूमिका है। ऐसे में अवैध खनन और खनिज चोरी का मुद्दा केवल कानून-व्यवस्था ही नहीं, बल्कि राजस्व और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण से भी जुड़ा हुआ है।
केंद्र और राज्य के बीच बढ़ सकता है टकराव
MMDR को लेकर जारी राजनीतिक बयानबाजी आने वाले दिनों में केंद्र और झारखंड सरकार के बीच टकराव को और बढ़ा सकती है। भाजपा जहां खनिज चोरी और अवैध खनन के मुद्दे पर राज्य सरकार को घेर रही है, वहीं राज्य सरकार की ओर से इन आरोपों पर जवाब सामने आना बाकी है।
राजनीतिक विवाद के बीच सबसे बड़ा सवाल यही है कि झारखंड की खनिज संपदा की निगरानी, अवैध खनन पर कार्रवाई और उससे होने वाले राजस्व की सुरक्षा को लेकर केंद्र और राज्य के बीच बेहतर समन्वय कैसे स्थापित हो।
फिलहाल MMDR और खनिज चोरी का मुद्दा झारखंड की राजनीति में नया विवाद बन गया है। निशिकांत दुबे के आरोपों के बाद विपक्ष और सत्तापक्ष के बीच बयानबाजी तेज होने की संभावना है। हालांकि, खनिज चोरी के संबंध में किए गए राजनीतिक दावों की स्वतंत्र पुष्टि और संबंधित सरकारी आंकड़ों के आधार पर स्थिति का आकलन किया जाना जरूरी है।






