JFC बंद होने पर पहली बार खुलकर बोले टाटा स्टील, बोले- बोर्ड का फैसला, वित्तीय गड़बड़ी से कोई संबंध नहीं

जमशेदपुर: जमशेदपुर फुटबॉल क्लब (जेएफसी) को बंद करने के फैसले के बाद उठ रहे तमाम सवालों और अटकलों पर सोमवार को पहली बार टाटा स्टील ने आधिकारिक रूप से अपनी स्थिति स्पष्ट की। कंपनी के वाइस प्रेसिडेंट (कॉरपोरेट सर्विसेज) डीबी सुंदररामम ने कहा कि जेएफसी को बंद करने का निर्णय पूरी तरह टाटा स्टील के बोर्ड का है और इसका किसी भी तरह की वित्तीय अनियमितता या गड़बड़ी से कोई संबंध नहीं है।

उन्होंने कहा कि खेलों में निवेश का उद्देश्य कभी लाभ कमाना नहीं होता, बल्कि खिलाड़ियों को अवसर देना, खेल संस्कृति को बढ़ावा देना और भविष्य की प्रतिभाओं को तैयार करना होता है। इसी सोच के साथ टाटा स्टील ने वर्षों तक जमशेदपुर एफसी का संचालन किया और भारतीय फुटबॉल को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

2017 से अब तक करीब 320 करोड़ रुपये का निवेश

डीबी सुंदररामम ने बताया कि वर्ष 2017 में स्थापित जमशेदपुर एफसी ने भारतीय फुटबॉल में अपनी अलग पहचान बनाई। टाटा स्टील ने क्लब के संचालन पर प्रतिवर्ष लगभग 30 से 35 करोड़ रुपये का निवेश किया। अन्य प्रायोजकों के सहयोग को मिलाकर क्लब में अब तक करीब 320 करोड़ रुपये का निवेश किया गया। उन्होंने कहा कि पिछले नौ वर्षों में जेएफसी ने कई उपलब्धियां हासिल कीं और इस पूरे सफर पर टाटा स्टील को गर्व है।

अब ग्रासरूट फुटबॉल पर रहेगा पूरा ध्यान

उन्होंने कहा कि भविष्य में कंपनी अपनी रणनीति बदलते हुए 7 से 19 वर्ष आयु वर्ग के खिलाड़ियों को तैयार करने पर विशेष ध्यान देगी। टाटा स्टील पहले से ही 19 विभिन्न खेलों की अकादमियां संचालित कर रही है और आगे भी जमीनी स्तर से प्रतिभाओं को निखारने का काम जारी रहेगा। उनका कहना था कि मजबूत ग्रासरूट सिस्टम ही भविष्य के राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ियों की नींव तैयार करता है।

कोचिंग स्टाफ पर भी रखा पक्ष

जेएफसी के कोचिंग स्टाफ को लेकर उठ रहे सवालों पर सुंदररामम ने कहा कि क्लब से जुड़े सभी कोच और तकनीकी विशेषज्ञ अपनी योग्यता, अनुभव और क्षमता के आधार पर नियुक्त किए गए थे। सभी ने क्लब के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया है और कंपनी उनके कार्यों का सम्मान करती है।

खिलाड़ियों को मिलेगा अनुबंध के अनुसार पूरा भुगतान

उन्होंने स्पष्ट किया कि जिन खिलाड़ियों का क्लब के साथ अनुबंध अभी प्रभावी है, उन्हें अनुबंध की शर्तों के अनुसार पूरी राशि का भुगतान किया जाएगा। इसके अलावा टाटा स्टील यह भी प्रयास करेगी कि इन खिलाड़ियों को अन्य क्लबों में खेलने के अवसर उपलब्ध हो सकें, ताकि उनके करियर पर किसी तरह का प्रतिकूल प्रभाव न पड़े।

जमशेदपुर में फुटबॉल की गतिविधियां रहेंगी जारी

डीबी सुंदररामम ने कहा कि जेएफसी का संचालन बंद होने का मतलब यह नहीं है कि जमशेदपुर में फुटबॉल समाप्त हो जाएगी। टाटा स्टील आगे भी शहर में फुटबॉल प्रतियोगिताओं, स्थानीय क्लबों, प्रशिक्षण कार्यक्रमों और युवा खिलाड़ियों को हरसंभव सहयोग देती रहेगी। उन्होंने विश्वास जताया कि जमशेदपुर की समृद्ध फुटबॉल परंपरा आगे भी कायम रहेगी और नई प्रतिभाओं को आगे बढ़ने के पर्याप्त अवसर मिलते रहेंगे।

उन्होंने अंत में कहा कि टाटा स्टील की प्राथमिकता हमेशा खेलों और खिलाड़ियों का विकास रही है और भविष्य में भी कंपनी इसी प्रतिबद्धता के साथ खेलों को बढ़ावा देती रहेगी।

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