जमशेदपुर/हावड़ा: रेलवे में कथित भ्रष्टाचार के खिलाफ केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए दक्षिण पूर्व रेलवे (South Eastern Railway) के चक्रधरपुर रेल मंडल में पदस्थापित डिप्टी चीफ सिग्नल एंड टेलीकम्युनिकेशन इंजीनियर (Dy. CSTE) सत्यम कुमार को ₹4 लाख की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार कर लिया। इस कार्रवाई में रिश्वत देने पहुंचे M/s MRT Signals Ltd., कोलकाता के दो प्रतिनिधियों सुब्रत चक्रवर्ती और राजू पंडित को भी गिरफ्तार किया गया। वहीं दर्ज प्राथमिकी (FIR) में कंपनी के प्रतिनिधि अमित टिबरेवाल (टिबरेवाल), कंपनी के निदेशक अंकित अंचालिया, कंपनी तथा अन्य अज्ञात व्यक्तियों को भी आरोपी बनाया गया है।
सीबीआई की यह कार्रवाई 25 जुलाई 2026 की सुबह हावड़ा रेलवे स्टेशन पर उस समय हुई, जब आरोपी अधिकारी कथित तौर पर रिश्वत की राशि प्राप्त कर हावड़ा–राउरकेला वंदे भारत एक्सप्रेस से चक्रधरपुर लौटने वाले थे। सीबीआई की एंटी करप्शन ब्रांच (ACB), कोलकाता की टीम पहले से जाल बिछाकर मौके पर मौजूद थी। जैसे ही ₹4 लाख की नकदी का लेन-देन हुआ, टीम ने तत्काल कार्रवाई करते हुए तीनों को रंगे हाथ गिरफ्तार कर लिया और पूरी रिश्वत राशि बरामद कर ली।
क्या है पूरा मामला?
सीबीआई द्वारा दर्ज प्राथमिकी के अनुसार यह मामला 24 जुलाई 2026 को दर्ज किया गया। आरोप है कि चक्रधरपुर रेल मंडल में सिग्नल एवं दूरसंचार कार्यों का ठेका संभाल रही M/s MRT Signals Ltd. के विभिन्न लंबित मामलों, विशेषकर Contract Variation File, Variation Bill, Price Variation Clause (PVC), Running Account (RA) Bill तथा Supplementary Agreement को मंजूरी दिलाने और कंपनी को अनुचित लाभ पहुंचाने के बदले रिश्वत की मांग की जा रही थी।
जांच एजेंसी के अनुसार Dy. CSTE सत्यम कुमार इन फाइलों के प्रसंस्करण और अनुमोदन की प्रक्रिया में प्रभावशाली भूमिका निभा रहे थे। आरोप है कि इन कार्यों को आगे बढ़ाने के लिए कंपनी से लगातार अवैध धन की मांग की गई।
मई 2026 में ₹5 लाख लेने का भी आरोप
एफआईआर में उल्लेख है कि मई 2026 में भी इसी कार्य के एवज में ₹5 लाख की रिश्वत ली गई थी। जांच में आरोप है कि कंपनी के प्रतिनिधि अमित टिबरेवाल ने अपने कर्मचारी सचिन झा के माध्यम से यह राशि सत्यम कुमार तक पहुंचाई थी। यह भुगतान कथित तौर पर Variation File को मंजूरी दिलाने के बदले किया गया था।
इसके बाद शेष भुगतान के रूप में आरोपी अधिकारी द्वारा ₹4 लाख और मांगे गए। कंपनी की ओर से इस भुगतान के लिए सहमति जताई गई, लेकिन बाद में पूरे मामले की शिकायत सीबीआई से कर दी गई।
24 जुलाई को हुई बातचीत से खुला मामला
जांच के दौरान सीबीआई को मिली जानकारी के अनुसार 24 जुलाई 2026 को सत्यम कुमार और कंपनी प्रतिनिधि अमित टिबरेवाल के बीच बातचीत हुई थी। आरोप है कि इस दौरान सत्यम कुमार ने बताया कि वह कंपनी के Supplementary Agreement और Variation Bill से जुड़े मामलों पर कार्य कर रहे हैं तथा दक्षिण पूर्व रेलवे मुख्यालय, गार्डन रीच, कोलकाता के वरिष्ठ अधिकारी बी. के. पटेल (CSTE) के अनुमोदन की प्रतीक्षा कर रहे हैं।
इसी बातचीत के दौरान कथित तौर पर रिश्वत की शेष राशि पहुंचाने की योजना भी बनाई गई।
हावड़ा स्टेशन पर बिछाया गया CBI का जाल
सीबीआई को शिकायत मिलने के बाद एजेंसी ने पूरे मामले का सत्यापन किया और हावड़ा रेलवे स्टेशन पर विशेष ट्रैप ऑपरेशन तैयार किया।
योजना के अनुसार 25 जुलाई 2026 की सुबह आरोपी अधिकारी जब हावड़ा–राउरकेला वंदे भारत एक्सप्रेस से चक्रधरपुर लौटने वाले थे, उसी समय कंपनी के प्रतिनिधियों द्वारा उन्हें ₹4 लाख नकद सौंपे गए। नकदी हाथ में आते ही पहले से तैनात सीबीआई अधिकारियों ने तत्काल कार्रवाई करते हुए सत्यम कुमार, सुब्रत चक्रवर्ती और राजू पंडित को रंगे हाथ गिरफ्तार कर लिया।
सीबीआई ने मौके से पूरी रिश्वत राशि बरामद कर ली, जिसे बाद में जब्त कर लिया गया।
FIR में किन-किन को बनाया गया आरोपी?
सीबीआई द्वारा दर्ज प्राथमिकी में निम्नलिखित व्यक्तियों एवं संस्था को आरोपी बनाया गया है—
सत्यम कुमार – उप मुख्य संकेत एवं दूरसंचार अभियंता (Dy. CSTE), दक्षिण पूर्व रेलवे, चक्रधरपुर मंडल।
अमित टिबरेवाल (टिबरेवाल) – प्रतिनिधि/कर्मचारी, M/s MRT Signals Ltd., कोलकाता।
अंकित अंचालिया – निदेशक, M/s MRT Signals Ltd., कोलकाता।
M/s MRT Signals Ltd. – पंजीकृत कार्यालय: 2, राजा वुडमंट स्ट्रीट, तृतीय तल, कोलकाता।
अन्य अज्ञात अधिकारी एवं व्यक्ति, जिनकी भूमिका जांच के दौरान सामने आ सकती है।
किन धाराओं में दर्ज हुआ मामला?
सीबीआई ने इस मामले में भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 तथा भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 (संशोधित 2018) की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है।
प्रमुख धाराएं हैं—
BNS की धारा 61(2) – आपराधिक षड्यंत्र (Criminal Conspiracy)
भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 7 – लोक सेवक द्वारा रिश्वत लेना
धारा 8 – रिश्वत देना
धारा 9 – व्यावसायिक संगठन द्वारा रिश्वतखोरी
धारा 10 – व्यावसायिक संगठन से जुड़े व्यक्ति द्वारा अपराध
धारा 12 – रिश्वतखोरी के लिए उकसाना अथवा सहायता करना
तीन राज्यों में एक साथ छापेमारी
गिरफ्तारी के तुरंत बाद सीबीआई ने पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में स्थित आरोपियों के आवासों तथा कार्यालय परिसरों पर एक साथ छापेमारी की।
छापेमारी के दौरान जांच एजेंसी ने कई महत्वपूर्ण दस्तावेज, टेंडर एवं ठेकों से संबंधित फाइलें, कंप्यूटर, लैपटॉप, हार्ड डिस्क, मोबाइल फोन और अन्य डिजिटल उपकरण जब्त किए हैं। इन इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों की फोरेंसिक जांच कर यह पता लगाया जाएगा कि कथित रिश्वतखोरी का यह नेटवर्क कितना व्यापक था और इसमें किन-किन अधिकारियों तथा निजी कंपनियों की भूमिका रही।
लंबित टेंडरों की भी होगी जांच
सीबीआई सूत्रों के अनुसार जांच केवल ₹4 लाख की बरामद रिश्वत तक सीमित नहीं रहेगी। चक्रधरपुर रेल मंडल में लंबित टेंडर, Variation Bills, PVC Claims, RA Bills तथा अन्य भुगतान संबंधी फाइलों की भी विस्तृत जांच की जाएगी।
जांच एजेंसी यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि क्या किसी अन्य अधिकारी या कर्मचारी ने भी इसी प्रकार ठेकेदारों से अवैध लाभ लिया है।
अदालत में पेश होंगे आरोपी
गिरफ्तार किए गए तीनों आरोपियों को सक्षम अदालत में पेश किया जाएगा। सीबीआई उनसे विस्तृत पूछताछ के लिए रिमांड की मांग कर सकती है। जांच के दौरान यदि अन्य अधिकारियों या निजी कंपनियों की संलिप्तता के प्रमाण मिलते हैं तो उनके खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी।
SER मुख्यालय से लेकर चक्रधरपुर मंडल तक मचा हड़कंप
इस कार्रवाई के बाद दक्षिण पूर्व रेलवे के गार्डन रीच मुख्यालय, कोलकाता से लेकर चक्रधरपुर रेल मंडल तक हड़कंप मच गया है। चक्रधरपुर मंडल भारतीय रेलवे के सबसे महत्वपूर्ण माल ढुलाई मंडलों में गिना जाता है। यहां प्रतिवर्ष हजारों करोड़ रुपये के रेल परियोजनाओं, सिग्नलिंग, दूरसंचार और आधारभूत संरचना से जुड़े कार्य होते हैं।
ऐसे महत्वपूर्ण मंडल के एक वरिष्ठ तकनीकी अधिकारी की कथित रिश्वत लेते हुए गिरफ्तारी ने रेलवे की निगरानी व्यवस्था, ठेका प्रणाली और पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सूत्रों के अनुसार कई लंबित फाइलों और ठेका प्रक्रियाओं की आंतरिक समीक्षा भी शुरू कर दी गई है।
Addl. SP तरुण कुमार सिन्हा कर रहे हैं जांच
पूरे मामले की जांच CBI, Anti Corruption Branch (ACB), Kolkata के अपर पुलिस अधीक्षक (Addl. SP) तरुण कुमार सिन्हा के नेतृत्व में की जा रही है। सीबीआई का कहना है कि जांच अभी प्रारंभिक चरण में है और जब्त दस्तावेजों तथा डिजिटल साक्ष्यों की जांच के आधार पर आगे और गिरफ्तारियां, नए आरोपी तथा अतिरिक्त धाराएं जोड़ी जा सकती हैं।
सीबीआई की ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति
सीबीआई ने स्पष्ट किया है कि सरकारी विभागों में भ्रष्टाचार के खिलाफ एजेंसी की “Zero Tolerance” नीति जारी रहेगी। यदि जांच में किसी अन्य अधिकारी, कर्मचारी या निजी कंपनी की संलिप्तता सामने आती है तो उनके खिलाफ भी कानून के अनुसार कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
फिलहाल पूरे मामले की जांच जारी है और आने वाले दिनों में इस कथित रिश्वतखोरी नेटवर्क से जुड़े कई और महत्वपूर्ण खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।






