प्रेस विज्ञप्ति
जमशेदपुर, 22 जुलाई 2026: राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (एनआईटी) जमशेदपुर की आउटरीच एक्टिविटीज़ यूनिट द्वारा राष्ट्रीय दिवस (तिरंगा अंगीकरण दिवस) के अवसर पर विशिष्ट व्याख्यान का आयोजन डायमंड जुबली लेक्चर हॉल कॉम्प्लेक्स (डीजेएलएचसी) के कक्ष संख्या 212 में किया गया। कार्यक्रम में संस्थान के प्राध्यापकों, अधिकारियों, कर्मचारियों, विद्यार्थियों एवं शोधार्थियों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि श्री तीर्थंकर दास, माननीय संयुक्त सचिव, लोकसभा सचिवालय, संसद भवन, नई दिल्ली तथा विशिष्ट अतिथि एवं मुख्य वक्ता डॉ. देबाशीष बंद्योपाध्याय, मुख्य वैज्ञानिक एवं प्रमुख, टेक्नोलॉजी मैनेजमेंट डायरेक्टोरेट, सीएसआईआर, नई दिल्ली थे। कार्यक्रम का आयोजन प्रो. गौतम सूत्रधार, निदेशक, एनआईटी जमशेदपुर एवं प्रो. राम विनय शर्मा, उपनिदेशक, एनआईटी जमशेदपुर के संरक्षण में सम्पन्न हुआ।
कार्यक्रम का शुभारंभ अतिथियों के स्वागत, दीप प्रज्ज्वलन एवं सम्मान समारोह से हुआ।
अपने उद्घाटन संबोधन में प्रो. गौतम सूत्रधार, निदेशक, एनआईटी जमशेदपुर ने तिरंगा अंगीकरण दिवस के ऐतिहासिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि भारत का राष्ट्रीय ध्वज देश की एकता, गरिमा और संवैधानिक मूल्यों का प्रतीक है। उन्होंने विद्यार्थियों से आह्वान किया कि वे देशभक्ति, नवाचार और सामाजिक उत्तरदायित्व की भावना को आत्मसात करते हुए विज्ञान, प्रौद्योगिकी एवं अनुसंधान के माध्यम से राष्ट्र निर्माण में सक्रिय योगदान दें।
मुख्य अतिथि श्री तीर्थंकर दास ने अपने संबोधन में भारतीय राष्ट्रीय ध्वज को राष्ट्रीय एकता, संप्रभुता और लोकतांत्रिक मूल्यों का प्रतीक बताते हुए युवाओं से संविधान में निहित आदर्शों का पालन करने तथा जिम्मेदार नागरिक बनकर नवाचार और राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया।
कार्यक्रम के अंतर्गत देशभक्ति की भावना से ओत-प्रोत एक आकर्षक सांस्कृतिक प्रस्तुति भी आयोजित की गई। एनआईटी जमशेदपुर की प्रथम महिला डॉ. इंद्राणी सूत्रधार ने अपने मधुर देशभक्ति गीत से उपस्थित सभी अतिथियों एवं श्रोताओं को भावविभोर कर दिया। इसके अतिरिक्त डॉ. विशेष रंजन कर एवं डॉ. शंकर राय की मनमोहक सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने कार्यक्रम को और भी गरिमामय एवं यादगार बना दिया। इन प्रस्तुतियों की मुख्य अतिथि, विशिष्ट अतिथि, प्राध्यापकों, कर्मचारियों एवं विद्यार्थियों ने मुक्त कंठ से सराहना की। उद्घाटन सत्र का समापन डॉ. तितास कुमार मुखोपाध्याय द्वारा धन्यवाद ज्ञापन तथा वंदे मातरम् एवं राष्ट्रीय गान के साथ हुआ।
उद्घाटन सत्र के उपरांत डॉ. देबाशीष बंद्योपाध्याय ने “बौद्धिक संपदा अधिकार (आईपीआर), उद्यमिता एवं मिशन-उन्मुख नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र” विषय पर विशिष्ट व्याख्यान दिया।
अपने व्याख्यान में डॉ. देबाशीष बंद्योपाध्याय ने कहा कि ज्ञान-आधारित अर्थव्यवस्था की दिशा में भारत की प्रगति के लिए नवाचार, बौद्धिक संपदा अधिकार (आईपीआर) और उद्यमिता के बीच मजबूत समन्वय अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि बौद्धिक संपदा अनुसंधान को व्यावसायिक उपयोग तक पहुंचाने का महत्वपूर्ण माध्यम है, जबकि उद्यमिता नवाचारी विचारों को समाजोपयोगी एवं बाजारोन्मुख उत्पादों और सेवाओं में परिवर्तित करती है।
उन्होंने मिशन-उन्मुख नवाचार की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता, सेमीकंडक्टर, उन्नत विनिर्माण, स्वच्छ ऊर्जा, हरित हाइड्रोजन, सर्कुलर इकोनॉमी तथा सतत विकास जैसे राष्ट्रीय प्राथमिकता वाले क्षेत्रों में अकादमिक संस्थानों, उद्योगों, सरकार एवं स्टार्टअप्स के बीच समन्वित प्रयास आवश्यक हैं।
डॉ. बंद्योपाध्याय ने क्षेत्रीय नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र की भूमिका पर भी विस्तार से प्रकाश डालते हुए कहा कि विश्वविद्यालयों एवं अनुसंधान संस्थानों जैसे ज्ञान-सृजन केंद्रों तथा उद्योगों, स्टार्टअप्स एवं एमएसएमई जैसे ज्ञान-उपयोगकर्ताओं के बीच मजबूत सहयोग से ही नवाचार को व्यापक स्तर पर समाज एवं उद्योग तक पहुंचाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि विश्व के अनेक सफल नवाचार केंद्र इसी प्रकार के सहयोगात्मक मॉडल पर आधारित हैं।
उन्होंने नवाचार, बौद्धिक संपदा और उद्यमिता के परस्पर संबंध को स्पष्ट करते हुए कहा कि नवाचार नए ज्ञान का सृजन करता है, बौद्धिक संपदा उस ज्ञान को संरक्षण एवं व्यावसायिक मूल्य प्रदान करती है, जबकि उद्यमिता उसे रोजगार सृजन एवं आर्थिक विकास का माध्यम बनाती है। उन्होंने यह भी बताया कि पेटेंट, कॉपीराइट, ट्रेडमार्क एवं डिज़ाइन जैसे बौद्धिक संपदा अधिकार निवेश आकर्षित करने, वेंचर कैपिटल प्राप्त करने तथा वैश्विक प्रतिस्पर्धा में सफलता दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
भारत में बौद्धिक संपदा अधिकारों के क्षेत्र में हो रही उल्लेखनीय प्रगति का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि पिछले पाँच वर्षों में डिजिटल प्रक्रियाओं, नीतिगत सुधारों, त्वरित परीक्षण व्यवस्था तथा स्टार्टअप्स एवं एमएसएमई के लिए बढ़ाए गए प्रोत्साहनों के कारण आईपी फाइलिंग में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। उन्होंने विद्यार्थियों एवं शोधकर्ताओं से अपने नवाचारों का संरक्षण करने, प्रौद्योगिकी हस्तांतरण को बढ़ावा देने तथा नवाचार आधारित स्टार्टअप स्थापित करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा, “अनुसंधान केवल शोध-पत्रों तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि उसे पेटेंट, प्रौद्योगिकी, स्टार्टअप और ऐसे उत्पादों का रूप लेना चाहिए जो विकसित भारत के निर्माण में योगदान दें।”
व्याख्यान के पश्चात आयोजित संवादात्मक सत्र में प्राध्यापकों, शोधार्थियों एवं विद्यार्थियों ने बौद्धिक संपदा संरक्षण, प्रौद्योगिकी हस्तांतरण, स्टार्टअप पारिस्थितिकी तंत्र, नवाचार नीति एवं अनुसंधान के व्यावसायीकरण से जुड़े विभिन्न विषयों पर प्रश्न पूछे। सत्र का समापन डॉ. सितेंदु मंडल द्वारा धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ।
इस कार्यक्रम का आयोजन प्रो. प्रभा चंद, अध्यक्ष, आउटरीच एक्टिविटीज़ के नेतृत्व में किया गया। डॉ. सितेंदु मंडल सह-अध्यक्ष, डॉ. अनंत कुमार आट्टा संयोजक तथा डॉ. तितास कुमार मुखोपाध्याय सह-संयोजक रहे। आयोजन समिति के सभी सदस्यों एवं संस्थान के प्राध्यापकों ने कार्यक्रम की सफलता में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
कार्यक्रम ने एनआईटी जमशेदपुर की संवैधानिक मूल्यों के प्रति प्रतिबद्धता, नवाचार एवं उद्यमिता की संस्कृति को बढ़ावा देने, बौद्धिक संपदा अधिकारों के प्रति जागरूकता विकसित करने तथा आत्मनिर्भर भारत एवं विकसित भारत 2047 के राष्ट्रीय संकल्प को साकार करने हेतु उद्योगोन्मुख अनुसंधान को प्रोत्साहित करने की प्रतिबद्धता को पुनः सुदृढ़ किया।





