कारोबारी राहुल अग्रवाल की मौत मामले में नई हलचल, गृह मंत्रालय की लीगल सेल ने झारखंड सरकार को दिए जांच के निर्देश
जमशेदपुर: बिष्टुपुर स्थित डीडी बार बिल्डिंग से कूदकर राउरकेला के कारोबारी राहुल अग्रवाल की हुई मौत के मामले में एक बार फिर नया मोड़ आ गया है। भारत सरकार के गृह मंत्रालय की लीगल सेल ने झारखंड सरकार को पूरे मामले की जांच कराने का निर्देश दिया है। गृह मंत्रालय के इस निर्देश के बाद करीब चार वर्ष पुराने इस बहुचर्चित मामले में दोबारा जांच की संभावना तेज हो गई है।
यह कार्रवाई मृतक राहुल अग्रवाल के भाई अंकित अग्रवाल द्वारा गृह मंत्रालय में दर्ज कराई गई शिकायत के आधार पर की गई है। अंकित अग्रवाल ने अपनी शिकायत में तत्कालीन सोनारी थाना में पदस्थापित एएसआई बालमुकुंद वर्मा की भूमिका पर गंभीर सवाल उठाते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की थी। उनका आरोप है कि मामले की जांच के दौरान कई महत्वपूर्ण तथ्यों को नजरअंदाज किया गया और सच्चाई सामने नहीं लाई गई।
अंकित अग्रवाल का कहना है कि 5 मई 2022 को आत्महत्या करने से पहले राहुल अग्रवाल ने एक वीडियो जारी किया था। उस वीडियो में राहुल ने अपनी पत्नी, ससुराल पक्ष तथा तत्कालीन एएसआई बालमुकुंद वर्मा पर मानसिक प्रताड़ना का आरोप लगाया था। राहुल ने वीडियो में दावा किया था कि वह लगातार मानसिक तनाव से गुजर रहे हैं और इसी कारण यह कदम उठाने के लिए मजबूर हो रहे हैं। यह वीडियो उस समय सोशल मीडिया पर भी काफी चर्चा का विषय बना था।
राहुल अग्रवाल की मौत के बाद पुलिस ने पूरे मामले की जांच की थी। जांच के दौरान पुलिस ने वीडियो सहित अन्य साक्ष्यों की पड़ताल करने का दावा किया था। हालांकि जांच पूरी होने के बाद पुलिस ने राहुल द्वारा लगाए गए आरोपों को प्रमाणित नहीं माना और उन्हें निराधार बताते हुए मामले में फाइनल रिपोर्ट (एफआरटी) न्यायालय में दाखिल कर दी थी। इसके बाद मामला लगभग बंद माना जा रहा था।
लेकिन मृतक के परिजनों ने पुलिस की जांच पर लगातार सवाल उठाए। उनका आरोप है कि मामले में सभी पहलुओं की निष्पक्ष जांच नहीं की गई और कई महत्वपूर्ण तथ्यों को अनदेखा कर दिया गया। इसी को लेकर अंकित अग्रवाल ने भारत सरकार के गृह मंत्रालय की लीगल सेल से हस्तक्षेप करने की मांग की थी।
अब गृह मंत्रालय की लीगल सेल द्वारा झारखंड सरकार को जांच कराने का निर्देश दिए जाने के बाद मामले में फिर से हलचल बढ़ गई है। माना जा रहा है कि राज्य सरकार इस निर्देश के आलोक में संबंधित विभागों से रिपोर्ट तलब कर सकती है और मामले की पुनः जांच अथवा समीक्षा कराने पर निर्णय ले सकती है।
यदि दोबारा जांच होती है तो आत्महत्या से पहले राहुल द्वारा जारी वीडियो, उसमें लगाए गए आरोप, पुलिस की पूर्व जांच और तत्कालीन जांच अधिकारियों की भूमिका समेत सभी पहलुओं की फिर से समीक्षा की जा सकती है। इससे यह स्पष्ट हो सकेगा कि पूर्व में की गई जांच पूरी तरह निष्पक्ष और तथ्यों पर आधारित थी या नहीं।
गृह मंत्रालय के निर्देश के बाद मृतक के परिजनों को निष्पक्ष जांच की उम्मीद जगी है। वहीं इस मामले पर सभी की निगाहें अब झारखंड सरकार की अगली कार्रवाई पर टिकी हुई हैं। यदि सरकार जांच के आदेश जारी करती है तो चार वर्ष पुराने इस चर्चित मामले में कई नए तथ्य सामने आने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।






