टाटानगर रेलवे स्टेशन पर संयुक्त अभियान “रेल प्रहरी” को बड़ी सफलता, CCTV, UPI और साइबर ट्रेसिंग से सुलझा ट्रेन में महिला की हत्या का मामला

टाटानगर रेलवे स्टेशन पर संयुक्त अभियान “रेल प्रहरी” को बड़ी सफलता, CCTV, UPI और साइबर ट्रेसिंग से सुलझा ट्रेन में महिला की हत्या का मामला

जमशेदपुर: टाटानगर रेलवे स्टेशन पर रेल सुरक्षा बल (RPF) और राजकीय रेल पुलिस (GRP) द्वारा चलाए गए संयुक्त अभियान “रेल प्रहरी” के तहत एक जघन्य हत्या कांड का सफलतापूर्वक खुलासा किया गया है। आधुनिक तकनीक, सीसीटीवी फुटेज, ऑनलाइन यूपीआई ट्रांजेक्शन, साइबर ट्रेसिंग और मोबाइल कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) के समन्वित विश्लेषण के आधार पर पुलिस ने महज कुछ दिनों में आरोपी को गिरफ्तार कर पूरे मामले का पर्दाफाश कर दिया। यह कार्रवाई GRP टाटा कांड संख्या 43/26, दिनांक 15 जून 2026 के तहत भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 103(i), 238 एवं 3(5) में दर्ज मामले में की गई।
इस पूरे ऑपरेशन की निगरानी डीएससी/RPF चक्रधरपुर तथा रेल पुलिस अधीक्षक के निर्देशन में की गई। जांच टीम में RPF टाटानगर के एएसआई बलबीर प्रसाद, कांस्टेबल रवि कुमार तथा GRP टाटानगर के एसआई मनराज भूट कुमार और आरक्षी अभिमन्यु शामिल थे।
ट्रेन में बेहोश मिली थी महिला
घटना की शुरुआत 6 जून 2026 को हुई, जब टाटानगर रेलवे यार्ड में खड़ी हटिया-टाटा एक्सप्रेस (ट्रेन संख्या 18602) के एक कोच में सफाई कर्मचारी को एक महिला अचेत अवस्था में मिली। सूचना मिलने पर RPF और GRP की टीम तत्काल मौके पर पहुंची और महिला को इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया। इलाज के दौरान 15 जून 2026 को महिला की मौत हो गई। डॉक्टरों द्वारा चोटों के कारण मृत्यु की पुष्टि होने के बाद मामले को हत्या में परिवर्तित कर गंभीरता से जांच शुरू की गई।
CCTV फुटेज से मिली पहली बड़ी सफलता
जांच के दौरान RPF और GRP ने टाटानगर से लेकर रांची स्टेशन तक उपलब्ध सभी सीसीटीवी कैमरों की फुटेज को खंगाला। 20 जून को हुई बैकट्रेसिंग के दौरान मृत महिला एक युवक के साथ कार से स्टेशन पहुंचती हुई दिखाई दी। दोनों स्टेशन परिसर में एक साथ घूमते और ट्रेन में चढ़ते हुए भी नजर आए।
इसी दौरान जांच टीम की नजर एक महत्वपूर्ण गतिविधि पर गई। संदिग्ध युवक ट्रेन में सवार होने से पहले स्टेशन के एक स्टॉल से पानी खरीदता दिखाई दिया, जहां उसने नकद भुगतान के बजाय UPI के माध्यम से ऑनलाइन पेमेंट किया था। यही छोटा-सा डिजिटल सुराग पूरी जांच का सबसे महत्वपूर्ण आधार बन गया।
UPI ट्रांजेक्शन से खुली आरोपी तक पहुंचने की राह
जांच अधिकारियों ने संबंधित स्टॉल संचालक से भुगतान का रिकॉर्ड और यूपीआई ट्रांजेक्शन की जानकारी प्राप्त की। इसके बाद 27 और 28 जून को बिष्टुपुर साइबर थाना की तकनीकी टीम के सहयोग से संबंधित UTR नंबर को डिकोड किया गया। इससे आरोपी का मोबाइल नंबर प्राप्त हो गया।
इसके बाद साइबर विशेषज्ञों और पुलिस टीम ने मोबाइल नंबर के आधार पर कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR), लोकेशन और टावर डंप का विश्लेषण किया। तकनीकी जांच से यह स्पष्ट हो गया कि संदिग्ध युवक उसी ट्रेन मार्ग पर यात्रा कर रहा था, जिस ट्रेन में महिला बाद में मृत अवस्था में मिली थी।
दूसरे मोबाइल नंबर ने खोले कई राज
हालांकि जांच के दौरान आरोपी का पहला मोबाइल नंबर बंद मिला, लेकिन पुलिस ने एडवांस तकनीकी विश्लेषण के जरिए उसका दूसरा सक्रिय मोबाइल नंबर खोज निकाला। इस नंबर के आधार पर उसकी वर्तमान लोकेशन, फोटो और अन्य तकनीकी जानकारियां प्राप्त हुईं।
इसके बाद बैंक रिकॉर्ड और KYC दस्तावेजों के माध्यम से आरोपी की पहचान कुमार ऋषभ (20 वर्ष), पिता अशोक कुमार सिंह, निवासी नरहा पानापुर, थाना राजेपुर, जिला पूर्वी चंपारण (बिहार) के रूप में की गई।
गुमशुदगी की रिपोर्ट से जुड़ी हत्या की कड़ी
30 जून को जांच के दौरान GRP टाटानगर को जानकारी मिली कि रांची के बरियातू थाना में एक महिला की गुमशुदगी का मामला पहले से दर्ज है और उसी मामले में कुमार ऋषभ से पूछताछ चल रही है।


RPF और GRP की संयुक्त टीम तुरंत बरियातू थाना पहुंची। वहां आरोपी के सामने मृत महिला की तस्वीर रखी गई, जिसे उसने माला देवी (27 वर्ष) के रूप में पहचान लिया। पूछताछ के दौरान आरोपी ने हत्या करने की बात स्वीकार कर ली।
शादी का दबाव बना हत्या की वजह
पूछताछ में आरोपी ने बताया कि उसका माला देवी के साथ संबंध था। महिला लगातार उस पर शादी करने का दबाव बना रही थी। इसी कारण उसने उसे बहला-फुसलाकर अपने साथ ट्रेन में ले जाने की योजना बनाई। यात्रा के दौरान दोनों के बीच विवाद हुआ, जिसके बाद आरोपी ने कोच के अंदर मौजूद मोबाइल चार्जर के तार से महिला का गला घोंट दिया। हत्या के बाद उसने महिला को गंभीर हालत में छोड़ दिया और मौके से फरार हो गया।
आरोपी गिरफ्तार, न्यायिक प्रक्रिया शुरू
कबूलनामे और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर आरोपी कुमार ऋषभ को गिरफ्तार कर विधिसम्मत कार्रवाई के लिए GRP टाटानगर को सौंप दिया गया है। पुलिस अब मामले में अन्य वैज्ञानिक साक्ष्यों और फोरेंसिक रिपोर्ट को भी केस डायरी का हिस्सा बना रही है।
तकनीक और समन्वय का उत्कृष्ट उदाहरण
रेल सुरक्षा बल और राजकीय रेल पुलिस की इस कार्रवाई को आधुनिक पुलिसिंग का उत्कृष्ट उदाहरण माना जा रहा है। सीसीटीवी फुटेज, डिजिटल पेमेंट रिकॉर्ड, साइबर ट्रैकिंग, मोबाइल लोकेशन और विभिन्न एजेंसियों के बीच समन्वय के जरिए एक ऐसे हत्या कांड का खुलासा किया गया, जिसमें शुरुआती दौर में आरोपी की पहचान तक नहीं हो पा रही थी। जांच एजेंसियों का मानना है कि यदि यूपीआई भुगतान की छोटी-सी डिजिटल कड़ी नहीं मिलती, तो आरोपी तक पहुंचना काफी कठिन हो सकता था।

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