प्रेस विज्ञप्ति
विस्थापितों के जनहित के मुद्दों को राजनीतिक रंग देना दुर्भाग्यपूर्ण : राम सिंह मुंडा
ग्रामसभा और पेसा कानून का भय दिखाकर स्थानीय ग्रामीणों को गुमराह कर निजी स्वार्थ साधने का लगाया आरोप, पारंपरिक माझी परगना को, मातृ संगठन के रूप में इस्तेमाल कर रहा है झा मु मो।
लोकतांत्रिक संवाद और विस्थापितों के अधिकारों की रक्षा पर दिया जोर ।
दिनांक : 30 जून 2026
स्थान : जमशेदपुर
तूरामडीह विस्थापित समिति, जमशेदपुर की एक आवश्यक बैठक तूरामडीह–लंदुप ग्राम सामुदायिक भवन में, विस्थापित समिति के संयोजक श्री रामसाई सोरेन की अध्यक्षता में संपन्न हुई। बैठक में मुख्य अतिथि के रूप में भाजपा नेता एवं आदिवासी सुरक्षा परिषद, जमशेदपुर (झारखंड) के अध्यक्ष श्री राम सिंह मुंडा उपस्थित रहे।
बैठक को संबोधित करते हुए श्री राम सिंह मुंडा ने कहा कि क्षेत्र के विस्थापित एवं प्रभावित परिवारों की समस्याओं को लेकर पूर्व मुख्यमंत्री आदरणीय श्री अर्जुन मुंडा जी द्वारा किए गए लोकतांत्रिक हस्तक्षेप एवं धरना कार्यक्रम पर हाल के दिनों में झामुमो विधायक श्री संजीव सरदार के इशारे पर दिए जा रहे कुछ राजनीतिक बयानों एवं सार्वजनिक प्रतिक्रियाओं पर आदिवासी सुरक्षा परिषद घोर आपत्ति व्यक्त करती है।
उन्होंने कहा कि इस पूरे प्रकरण को मूल जनहित के मुद्दों से भटकाकर राजनीतिक रंग देने का प्रयास किया जा रहा है, जबकि वास्तविकता यह है कि आदरणीय श्री अर्जुन मुंडा जी क्षेत्र के विस्थापित एवं प्रभावित परिवारों के आग्रह पर उनकी समस्याओं को सुनने, समझने तथा उनके समाधान के उद्देश्य से लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात रखने के लिए तूरामडीह स्थित धरना स्थल पर पहुंचे थे।
श्री राम सिंह मुंडा ने बताया कि इससे पूर्व श्रीमती डॉ. मीरा मुंडा जी ने UCIL के संबंधित अधिकारियों से मुलाकात कर विस्थापित परिवारों की समस्याओं एवं मांगों को प्रमुखता से उठाया था तथा उनके समाधान के लिए आवश्यक पहल करने का आग्रह किया था। इस दौरान भाजपा जिला अध्यक्ष श्री संजीव सिन्हा भी उपस्थित थे और उन्होंने प्रभावित परिवारों की समस्याओं को संबंधित अधिकारियों तक पहुँचाने में सहयोग किया।
उन्होंने कहा कि विस्थापितों द्वारा सौंपे गए मांग-पत्र में स्थानीय विस्थापितों को रोजगार में प्राथमिकता, समुचित पुनर्वास, आश्रितों को रोजगार के अवसर, धार्मिक एवं सांस्कृतिक स्थलों का संरक्षण एवं पुनर्निर्माण, सड़क, बिजली एवं पेयजल जैसी मूलभूत सुविधाएँ, बच्चों की शिक्षा एवं प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए सहयोग, प्रदूषण नियंत्रण तथा स्थानीय हितों की सुरक्षा जैसे महत्वपूर्ण विषय शामिल हैं।

श्री मुंडा ने क्षेत्र की जनता से प्रश्न करते हुए कहा, “इन मांगों में ऐसा कौन-सा विषय है जो जनहित, विस्थापितों के अधिकारों अथवा क्षेत्र के विकास के विरुद्ध माना जा सकता है?”
उन्होंने कहा कि आदरणीय श्री अर्जुन मुंडा जी ने संबंधित अधिकारियों से केवल यह आग्रह किया था कि केंद्र सरकार द्वारा पूर्व में जनहित एवं प्रभावित परिवारों के हित में लिए गए निर्णयों तथा नीतिगत प्रावधानों के अनुरूप संवेदनशील एवं प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए, ताकि क्षेत्र की जनता को उसका वास्तविक लाभ मिल सके।
श्री राम सिंह मुंडा ने आरोप लगाया कि कुछ सामाजिक व्यक्तियों द्वारा दिए जा रहे राजनीतिक बयान और प्रतिक्रियाएँ मूल मुद्दों से लोगों का ध्यान भटकाने का प्रयास हैं। उन्होंने कहा कि ग्रामसभा एवं पेसा कानून का भय दिखाकर स्थानीय ग्रामीणों को गुमराह किया जा रहा है, ताकि कुछ लोग अपना निजी स्वार्थ सिद्ध कर सकें।
उन्होंने कहा कि आदिवासी सुरक्षा परिषद का स्पष्ट मत है कि जनहित के विषयों पर संवाद तथ्यों, संवैधानिक व्यवस्था और समाधान की दिशा में होना चाहिए, न कि राजनीतिक दुष्प्रचार और भ्रामक बयानबाजी के आधार पर।
श्री मुंडा ने कहा कि जो लोग आदरणीय श्री अर्जुन मुंडा जी के विरुद्ध लगातार बयानबाजी कर रहे हैं तथा उन्हें क्षेत्र में प्रवेश नहीं करने देने जैसी धमकियाँ दे रहे हैं, उनकी विश्वसनीयता एवं सार्वजनिक भूमिका का मूल्यांकन क्षेत्र की जागरूक जनता स्वयं करने में सक्षम है। व्यक्तिगत आरोप-प्रत्यारोप के बजाय जनहित, विस्थापितों के अधिकार और क्षेत्रीय विकास जैसे विषयों पर गंभीर चर्चा एवं ठोस पहल की जानी चाहिए।
उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में प्रत्येक नागरिक एवं जनप्रतिनिधि को जनता से मिलने, उनकी समस्याएँ सुनने तथा संवैधानिक दायरे में रहकर जनहित के मुद्दे उठाने का पूर्ण अधिकार है। मतभेद हो सकते हैं, किंतु लोकतांत्रिक संवाद सदैव सर्वोपरि रहना चाहिए।
आदिवासी सुरक्षा परिषद ने UCIL प्रबंधन, जिला प्रशासन एवं संबंधित संस्थाओं से मांग की कि क्षेत्र में शांति, सौहार्द एवं लोकतांत्रिक वातावरण बनाए रखते हुए विस्थापित परिवारों की समस्याओं का समयबद्ध, पारदर्शी एवं न्यायसंगत समाधान सुनिश्चित किया जाए।
“विस्थापितों का सम्मान, जनहित का समाधान और लोकतांत्रिक संवाद ही क्षेत्र के विकास का सशक्त मार्ग है।”
आज के इस आवश्यक बैठक में मुख्य रूप से पूर्व मुखिया प्रकाश सांडील, रामसाईं सोरेन,ईश्वर सोरेन, बीजेपी नेता संजय सिंह मुंडा,बीजेपी ST मोर्चा जिला अध्यक्ष रमेश बासके जुझार समद, गणेश सरदार, मंगल कराई, देवाय दिग्गी, पाथोर दिग्गी, पूचू दिग्गी रिया कुंकल, सरिता कुंकल, बबलू करूआ।
किशोर महतो के अलावा गांव के महिला पुरुष आदि उपस्थित रहे।
— राम सिंह मुंडा
अध्यक्ष, आदिवासी सुरक्षा परिषद, जमशेदपुर (झारखंड)
भाजपा नेता, झारखंड प्रदेश





