बंगाल में बिखरती TMC, MP, MLA और नेताओं में भगदड़

कोलकाता : पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में सत्ता गंवाने के बाद तृणमूल कांग्रेस ऐसे दौर से गुजर रही है, जहां उसकी सबसे बड़ी चुनौती BJP नहीं, अपने संगठन को एकजुट बनाए रखना है। बड़ी संख्या में TMC विधायकों के अलग गुट बनाने के बाद अब करीब 20 सांसदों के भी अलग होने की चर्चा है। TMC की सबसे बड़ी ताकत हमेशा से ममता बनर्जी का करिश्माई नेतृत्व और संगठन पर उनकी मजबूत पकड़ रही है। पार्टी का राजनीतिक ढांचा काफी हद तक व्यक्तित्व आधारित रहा है।

यही मॉडल पिछले डेढ़ दशक से पार्टी की सफलता का आधार था। लेकिन, हार के बाद परिस्थितियां बदल गई हैं। जीत के समय जो केंद्रीकृत नेतृत्व संगठन की ताकत माना जाता है, हार के बाद वही मॉडल संवाद, भागीदारी और निर्णय प्रक्रिया को लेकर सवालों के घेरे में आ सकता है।
ममता बनर्जी के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह है कि वह हार के बाद पार्टी कार्यकर्ताओं और नेताओं का मनोबल कैसे बनाए रखें। सत्ता में रहते हुए संगठन को एकजुट रखना अपेक्षाकृत आसान होता है, क्योंकि सत्ता स्वयं एक आकर्षण और अनुशासन का माध्यम है। किसी भी दल की असली परीक्षा शुरू होती है विपक्ष में आने के बाद। नेताओं को भरोसा दिलाना पड़ता है कि पार्टी फिर से सत्ता हासिल करने की क्षमता रखती है और संगठन में उनकी भूमिका सुरक्षित है।

Leave a Comment