जमशेदपुर में मणिपाल हॉस्पिटल्स टाटानगरिया का जागरूकता सत्र आयोजित, सीपीआर और समय पर हृदय उपचार के महत्व पर दिया गया जोर

जमशेदपुर में मणिपाल हॉस्पिटल्स टाटानगरिया का जागरूकता सत्र आयोजित, सीपीआर और समय पर हृदय उपचार के महत्व पर दिया गया जोर

जमशेदपुर: देश के अग्रणी स्वास्थ्य सेवा संस्थानों में शामिल मणिपाल हॉस्पिटल्स समूह की इकाई मणिपाल हॉस्पिटल्स टाटानगरिया द्वारा जमशेदपुर में एक विशेष सीपीआर (कार्डियोपल्मोनरी रिससिटेशन) प्रशिक्षण एवं जन-जागरूकता सत्र का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य आम लोगों के बीच हृदय संबंधी आपात स्थितियों, समय पर चिकित्सा हस्तक्षेप, जीवन रक्षक तकनीकों और सीपीआर के महत्व के प्रति जागरूकता बढ़ाना था।
इस अवसर पर मणिपाल हॉस्पिटल्स टाटानगरिया के वरिष्ठ चिकित्सकों ने भाग लेते हुए हृदय रोगों की बढ़ती चुनौती, उनसे बचाव के उपाय, समय पर पहचान तथा आपातकालीन परिस्थितियों में तत्काल प्रतिक्रिया की भूमिका पर विस्तार से जानकारी दी। कार्यक्रम में अस्पताल के प्रमुख विशेषज्ञ डॉ. कौशिक मुखर्जी, सीनियर कंसल्टेंट – कार्डियोथोरेसिक सर्जरी तथा डॉ. सुमंत चटर्जी, सीनियर कंसल्टेंट – कार्डियोलॉजी ने उपस्थित लोगों को संबोधित किया।
बढ़ते हृदय रोग बन रहे गंभीर चिंता का विषय
विशेषज्ञों ने बताया कि भारत में हृदय एवं रक्तवाहिका संबंधी रोग (सीवीडी) तेजी से एक गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य चुनौती बनते जा रहे हैं। आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2023 में देश में हुई कुल मौतों में लगभग एक-तिहाई मौतों के लिए हृदय रोग जिम्मेदार रहे। अनुमानित रूप से करीब 2.8 मिलियन लोगों की मृत्यु हृदय संबंधी बीमारियों के कारण दर्ज की गई, जो इस समस्या की गंभीरता को दर्शाती है।
डॉक्टरों ने कहा कि बदलती जीवनशैली, अनियमित खानपान, बढ़ता तनाव, धूम्रपान, तंबाकू सेवन, मोटापा, मधुमेह, उच्च रक्तचाप तथा शारीरिक निष्क्रियता जैसे कारक हृदय रोगों के प्रसार को बढ़ा रहे हैं। चिंताजनक बात यह है कि अब युवा वर्ग भी बड़ी संख्या में हृदय संबंधी बीमारियों से प्रभावित हो रहा है।
सीपीआर से बचाई जा सकती हैं हजारों जिंदगियां


कार्यक्रम के दौरान विशेषज्ञों ने बताया कि हृदयाघात अथवा कार्डियक अरेस्ट जैसी आपात स्थितियों में शुरुआती कुछ मिनट अत्यंत महत्वपूर्ण होते हैं। यदि मरीज को समय रहते सीपीआर दिया जाए और तत्काल चिकित्सकीय सहायता उपलब्ध हो जाए, तो उसकी जान बचने की संभावना कई गुना बढ़ जाती है।
डॉ. कौशिक मुखर्जी ने कहा कि कार्डियक अरेस्ट की स्थिति में आसपास मौजूद लोगों द्वारा तुरंत और सही तरीके से दी गई सहायता जीवन और मृत्यु के बीच का अंतर साबित हो सकती है। उन्होंने कहा कि विकसित देशों में बड़ी संख्या में लोग सीपीआर तकनीक से परिचित हैं, जिसके कारण कई मरीजों की जान समय रहते बचाई जा सकती है। भारत में भी इस प्रकार की जीवनरक्षक तकनीकों के प्रति जागरूकता बढ़ाने की आवश्यकता है।
उन्होंने कहा कि सीपीआर केवल चिकित्सा पेशेवरों के लिए ही नहीं, बल्कि आम नागरिकों के लिए भी एक महत्वपूर्ण कौशल है। यदि स्कूलों, कॉलेजों, कार्यालयों और सार्वजनिक संस्थानों में नियमित रूप से ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जाएं तो आपातकालीन परिस्थितियों में अधिक प्रभावी प्रतिक्रिया सुनिश्चित की जा सकती है।
समय पर उपचार से रोकी जा सकती हैं गंभीर जटिलताएं
डॉ. सुमंत चटर्जी ने अपने संबोधन में कहा कि हृदय एवं रक्तवाहिका संबंधी रोग मृत्यु के प्रमुख कारणों में शामिल हैं। उन्होंने कहा कि उच्च रक्तचाप, मधुमेह, मोटापा, धूम्रपान, तनाव और निष्क्रिय जीवनशैली जैसे जोखिम कारकों की पहचान और समय रहते नियंत्रण अत्यंत आवश्यक है।
उन्होंने बताया कि नियमित स्वास्थ्य जांच, शुरुआती चरण में रोग की पहचान और समय पर उपचार के माध्यम से हृदय रोगों से होने वाली कई जटिलताओं को रोका जा सकता है। स्वस्थ जीवनशैली अपनाना, संतुलित आहार लेना, नियमित व्यायाम करना, तनाव को नियंत्रित रखना और समय-समय पर स्वास्थ्य परीक्षण करवाना हृदय को स्वस्थ बनाए रखने के महत्वपूर्ण उपाय हैं।
डॉ. चटर्जी ने कहा कि मणिपाल हॉस्पिटल्स लोगों को निवारक स्वास्थ्य देखभाल को प्राथमिकता देने और किसी भी शुरुआती लक्षण को नजरअंदाज न करने की सलाह देता है। उन्होंने कहा कि छाती में दर्द, सांस फूलना, अत्यधिक थकान, धड़कनों का असामान्य होना अथवा अन्य चेतावनी संकेतों की स्थिति में तुरंत चिकित्सकीय सलाह लेनी चाहिए।
मरीजों ने साझा किए प्रेरणादायक अनुभव
जागरूकता सत्र के दौरान अस्पताल में सफलतापूर्वक उपचार प्राप्त कर चुके कई मरीजों ने भी अपने अनुभव साझा किए। इनमें से एक मरीज श्री काशी नाथ सिंह ने हाल ही में मणिपाल हॉस्पिटल्स टाटानगरिया में सफल कोरोनरी आर्टरी बायपास ग्राफ्टिंग (सीएबीजी) सर्जरी कराई थी।
अपने अनुभव को साझा करते हुए उन्होंने कहा कि अस्पताल में भर्ती होने से लेकर सर्जरी और रिकवरी तक उन्हें उत्कृष्ट चिकित्सा सेवाएं प्राप्त हुईं। उन्होंने विशेष रूप से डॉ. कौशिक मुखर्जी और उनकी टीम की सराहना करते हुए कहा कि डॉक्टरों की विशेषज्ञता, समर्पण और मरीजों के प्रति संवेदनशील व्यवहार ने उन्हें नया जीवन दिया है।
उन्होंने कहा कि उपचार के दौरान अस्पताल की पूरी टीम ने न केवल उनका, बल्कि उनके परिवार का भी मनोबल बढ़ाया। कठिन समय में मिली यह सहायता और भरोसा उनके लिए अत्यंत महत्वपूर्ण रहा। उन्होंने अस्पताल के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं और मरीज-केंद्रित दृष्टिकोण ने उनके जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने का काम किया है।
व्यावहारिक प्रशिक्षण भी दिया गया
कार्यक्रम के अंत में प्रतिभागियों को सीपीआर और बेसिक लाइफ सपोर्ट (बीएलएस) से संबंधित व्यावहारिक प्रशिक्षण भी दिया गया। विशेषज्ञों ने विभिन्न आपातकालीन परिस्थितियों में अपनाई जाने वाली तकनीकों का प्रदर्शन किया और प्रतिभागियों को स्वयं अभ्यास करने का अवसर प्रदान किया।
प्रशिक्षण के दौरान बताया गया कि किसी व्यक्ति के अचानक बेहोश होने, सांस रुकने अथवा हृदय गति बंद होने की स्थिति में घबराने के बजाय तुरंत सही कदम उठाना आवश्यक है। प्रतिभागियों को आपातकालीन सेवाओं से संपर्क करने, मरीज की स्थिति का आकलन करने तथा सीपीआर की मूल तकनीकों के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई।
स्वास्थ्य जागरूकता को मजबूत बनाने की दिशा में पहल
मणिपाल हॉस्पिटल्स टाटानगरिया ने कहा कि अस्पताल पूर्वी भारत के लोगों तक गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने के साथ-साथ स्वास्थ्य जागरूकता बढ़ाने के लिए भी लगातार कार्य कर रहा है। अस्पताल का उद्देश्य लोगों को निवारक स्वास्थ्य देखभाल, समय पर जांच, शीघ्र निदान, आधुनिक उपचार सुविधाओं तथा आपातकालीन तैयारियों के प्रति जागरूक बनाना है।
अस्पताल प्रबंधन के अनुसार ऐसे कार्यक्रमों के माध्यम से समुदाय को स्वास्थ्य संबंधी महत्वपूर्ण जानकारियां उपलब्ध कराई जा रही हैं, जिससे लोग गंभीर बीमारियों की समय रहते पहचान कर सकें और आवश्यक उपचार प्राप्त कर अपने जीवन की गुणवत्ता में सुधार ला सकें।
कार्यक्रम में बड़ी संख्या में नागरिकों, स्वास्थ्यकर्मियों, सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों तथा विभिन्न आयु वर्ग के लोगों ने भाग लिया और हृदय स्वास्थ्य, आपातकालीन चिकित्सा तथा सीपीआर जैसी जीवनरक्षक तकनीकों के बारे में उपयोगी जानकारी प्राप्त की। आयोजकों ने उम्मीद जताई कि इस प्रकार की पहल भविष्य में भी जारी रहेगी और समाज को अधिक सुरक्षित, जागरूक तथा स्वास्थ्य के प्रति सजग बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

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