सड़क और पेयजल संकट को लेकर छह गांवों के ग्रामीणों का प्रदर्शन, सरकार के खिलाफ जताया आक्रोश

सड़क और पेयजल संकट को लेकर छह गांवों के ग्रामीणों का प्रदर्शन, सरकार के खिलाफ जताया आक्रोश

जमशेदपुर (डुमरिया): पोटका विधानसभा क्षेत्र अंतर्गत डुमरिया प्रखंड की केंदुआ पंचायत में सड़क और पेयजल की समस्या को लेकर ग्रामीणों का गुस्सा फूट पड़ा। पंचायत के बाकीशोल, हतनाबेड़ा, सारुदा और लीपुंगघुटू समेत करीब 15 किलोमीटर क्षेत्र में बसे छह गांवों के ग्रामीणों ने जनता दल यूनाइटेड (जदयू) के जिला महासचिव वीर सिंह देवगम के नेतृत्व में जोरदार प्रदर्शन किया। प्रदर्शन में बड़ी संख्या में महिला, पुरुष और बच्चे शामिल हुए।
ग्रामीणों ने जर्जर सड़क, पेयजल संकट और बुनियादी सुविधाओं के अभाव को लेकर झारखंड सरकार के खिलाफ नाराजगी जाहिर की। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि चुनाव के समय जनप्रतिनिधि और नेता गांव पहुंचकर विकास के बड़े-बड़े वादे करते हैं तथा वोट मांगते हैं, लेकिन चुनाव खत्म होते ही गांव की समस्याओं को भूल जाते हैं। ग्रामीणों ने चेतावनी दी कि यदि उनकी समस्याओं का समाधान नहीं हुआ तो आने वाले चुनाव में वे नेताओं को सबक सिखाएंगे और गांव में प्रवेश नहीं करने देंगे।
ग्रामीणों ने बताया कि सड़क की बदहाल स्थिति के कारण गांव का संपर्क आसपास के क्षेत्रों से लगभग कट गया है। हालात इतने खराब हैं कि लोग इस क्षेत्र में अपनी बेटियों का रिश्ता तक करने से कतराते हैं। गर्भवती महिलाओं और गंभीर रूप से बीमार लोगों को साइकिल या मोटरसाइकिल के सहारे डुमरिया अस्पताल पहुंचाना पड़ता है। खराब सड़क के कारण गांव तक एम्बुलेंस भी नहीं पहुंच पाती, जिससे ग्रामीणों को झाड़-फूंक और पारंपरिक उपचार पर निर्भर रहना पड़ता है।
ग्रामीणों ने यह भी बताया कि क्षेत्र में संचार व्यवस्था भी बदहाल है। गांव से लगभग आधा किलोमीटर दूर स्थित बीएसएनएल टावर ही किसी तरह काम करता है। आपात स्थिति में नेटवर्क नहीं मिलने से पूरे क्षेत्र का संपर्क बाहरी दुनिया से कट जाता है।
मौके पर जदयू के जिला महासचिव वीर सिंह देवगम ने कहा कि ग्रामीणों की समस्याओं को लेकर जल्द ही डुमरिया प्रखंड विकास पदाधिकारी (बीडीओ) के माध्यम से उपायुक्त के नाम ज्ञापन सौंपा जाएगा। उन्होंने कहा कि यदि इसके बाद भी समस्याओं का समाधान नहीं हुआ तो छह गांवों के ग्रामीण उपायुक्त कार्यालय पहुंचकर अपनी मांगों को लेकर आंदोलन करेंगे।
फिलहाल ग्रामीणों की मांगों को लेकर प्रशासन क्या कदम उठाता है और कब तक क्षेत्र को सड़क एवं पेयजल जैसी मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराई जाती हैं, इस पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।

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