जमशेदपुर में गायत्री परिवार का भव्य आयोजन: पंचकुंडीय महायज्ञ, 600 श्रद्धालुओं ने दी आहुति, पर्यावरण संरक्षण का भी दिया संदेश
जमशेदपुर। अखिल विश्व गायत्री परिवार शांतिकुंज हरिद्वार के तत्वावधान में जमशेदपुर के सोनारी स्थित कागल नगर अंतर्गत निर्मल नगर में एक भव्य धार्मिक एवं सामाजिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। यह आयोजन वंदनीय माताजी भगवती देवी शर्मा के जन्म शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में किया गया, जिसमें स्थानीय युवाओं और महिला मंडल की सक्रिय भागीदारी देखने को मिली।
दुर्गा पूजा मैदान में आयोजित इस कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण पंचकुंडीय गायत्री महायज्ञ रहा। महायज्ञ में लगभग 600 से अधिक श्रद्धालुओं ने भाग लेकर विधिवत हवन किया और विश्व शांति, सुख-समृद्धि तथा मानव कल्याण की कामना की। पूरे वातावरण में वैदिक मंत्रोच्चार और भक्ति भाव से आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार होता रहा।
कार्यक्रम के दौरान गायत्री हवन के साथ-साथ समाज में सकारात्मक परिवर्तन और संस्कारों के प्रसार पर भी विशेष बल दिया गया। महिला मंडल की संचालिका श्रीमती डालिया भट्टाचार्य के नेतृत्व में जन्मदिन संस्कार और विवाह दिवस संस्कार भी संपन्न कराए गए। इन संस्कारों के माध्यम से लोगों को भारतीय परंपराओं और आध्यात्मिक मूल्यों से जोड़ने का प्रयास किया गया।
आयोजन के अंत में सभी श्रद्धालुओं के बीच भोग-प्रसाद का वितरण किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में लोगों ने सहभागिता निभाई। कार्यक्रम को सफल बनाने में देवाशीष, गुरुपदा, नरेश, विशाल, जलेश्वरी, विमला, अनीता, सरल, माधुरी, संजू, कंचन, विक्रम सिंह, संजय सहित कई अन्य सदस्यों का महत्वपूर्ण योगदान रहा।
इस आयोजन के साथ-साथ गायत्री परिवार द्वारा पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी प्रमुखता से दिया गया। कार्यकर्ताओं ने लोगों को वृक्षारोपण के लिए प्रेरित किया और बताया कि प्रकृति की रक्षा करना हम सभी का कर्तव्य है। इसी कड़ी में हरिद्वार सहित विभिन्न स्थानों पर चलाए जा रहे अभियानों का भी उल्लेख किया गया, जहां सैकड़ों पौधे लगाकर हरित वातावरण बनाने की दिशा में कार्य किया जा रहा है।
कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने कहा कि माताजी भगवती देवी शर्मा का जीवन सेवा, साधना और समाज सुधार का प्रतीक रहा है। उनके आदर्शों को अपनाकर ही समाज में सकारात्मक बदलाव लाया जा सकता है। उन्होंने युवाओं से विशेष रूप से अपील की कि वे नशामुक्ति, स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण जैसे अभियानों से जुड़कर समाज के निर्माण में अपनी भागीदारी सुनिश्चित करें।
पूरे आयोजन ने न केवल धार्मिक आस्था को मजबूत किया, बल्कि सामाजिक एकता और सांस्कृतिक मूल्यों को भी बढ़ावा दिया। स्थानीय लोगों ने इस तरह के आयोजनों की सराहना करते हुए भविष्य में भी ऐसे कार्यक्रमों के निरंतर आयोजन की अपेक्षा जताई।
गायत्री परिवार के इस प्रयास ने यह स्पष्ट कर दिया कि आध्यात्मिकता और सामाजिक जिम्मेदारी का समन्वय ही एक बेहतर समाज की नींव रख सकता है।






