जमशेदपुर में मटमैले व बदबूदार पानी की आपूर्ति पर लोगों का आक्रोश, प्रशासन से हस्तक्षेप की मांग
जमशेदपुर: शहर में पेयजल आपूर्ति को लेकर एक गंभीर समस्या सामने आई है। टाटा यूटिलिटीज एंड इंफ्रास्ट्रक्चर सर्विसेज लिमिटेड (यूआईएसएल) द्वारा शहर के विभिन्न इलाकों में पिछले 20–25 दिनों से मटमैला और बदबूदार पानी सप्लाई किए जाने की शिकायतें लगातार मिल रही हैं। इससे स्थानीय निवासियों में भारी आक्रोश व्याप्त है और उन्होंने प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, यूआईएसएल कंपनी जमशेदपुर के कई क्षेत्रों के साथ-साथ अपने कमांड एरिया में भी पानी की आपूर्ति करती है। कंपनी का दावा है कि उसकी टेस्टिंग लैब को आईएसओ-आईईसी 17025 का प्रमाण पत्र प्राप्त है, जिससे पानी की गुणवत्ता सुनिश्चित करने की बात कही जाती है। इसके बावजूद हकीकत इसके विपरीत नजर आ रही है।
शिकायत के अनुसार, कदमा क्षेत्र के भाटिया बस्ती, उलियान, रामजनम नगर और शास्त्रीनगर समेत कई इलाकों में गंदा पानी सप्लाई हो रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि पानी न सिर्फ मटमैला है, बल्कि उसमें से बदबू भी आती है। कई उपभोक्ताओं ने यह भी बताया कि पानी के साथ कीड़े निकलने की घटनाएं भी सामने आई हैं, जो स्वास्थ्य के लिए बेहद खतरनाक है।
स्थानीय निवासियों ने बताया कि यदि इस पानी को किसी बर्तन में 24 घंटे के लिए छोड़ दिया जाए, तो उसके तल में गंदगी और कचरा स्पष्ट रूप से जमा हो जाता है। इसके साथ ही पानी से तेज बदबू आने लगती है, जिससे इसका उपयोग करना मुश्किल हो जाता है। इस संबंध में उपभोक्ताओं ने फोटो भी संलग्न कर अपनी शिकायत को प्रमाणित किया है।
लोगों का आरोप है कि उन्होंने कई बार यूआईएसएल के शिकायत विभाग में इस मुद्दे को उठाया, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है। शिकायतों के बावजूद पानी की गुणवत्ता में कोई सुधार नहीं हुआ है, जिससे लोगों में निराशा और गुस्सा बढ़ता जा रहा है।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि इस तरह के दूषित पानी के सेवन से बीमारियों का खतरा बढ़ गया है, खासकर बच्चों और बुजुर्गों के लिए यह स्थिति बेहद चिंताजनक है। लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि वह इस मामले को गंभीरता से लेते हुए संबंधित कंपनी को निर्देश दे कि पानी की गुणवत्ता में तत्काल सुधार किया जाए।
अंततः, प्रभावित उपभोक्ताओं ने प्रशासन से अपील की है कि इस समस्या का जल्द समाधान निकाला जाए, ताकि उन्हें स्वच्छ और सुरक्षित पेयजल उपलब्ध हो सके। यदि समय रहते कार्रवाई नहीं की गई, तो लोग आंदोलन करने को भी बाध्य हो सकते हैं।







