आज हम नमन करते हैं एक ऐसे वीर सपूत को, जिन्होंने 1971 के युद्ध में अपने अदम्य साहस और देशभक्ति का परिचय दिया। 77 वर्ष की आयु में हमसे विदा लेने वाले युद्धवीर घनश्याम सिंह प्रसाद कदम जी का जीवन त्याग, समर्पण और राष्ट्रसेवा का प्रतीक रहा।
1971 के ऐतिहासिक युद्ध में उन्होंने जो शौर्य और पराक्रम दिखाया, वह आज भी हमारे लिए प्रेरणा का स्रोत है। रणभूमि में उनकी वीरता ने न केवल राष्ट्र की रक्षा की, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए साहस और कर्तव्यनिष्ठा का अनुपम उदाहरण प्रस्तुत किया।
युद्ध के बाद भी उन्होंने अपने जीवन को सम्मान, अनुशासन और सेवाभाव से जिया। एक सैनिक के रूप में उनका योगदान अविस्मरणीय है, और एक व्यक्ति के रूप में उनका चरित्र अनुकरणीय।
आज जब वे हमारे बीच नहीं हैं, तो उनकी स्मृतियां, उनके आदर्श और उनकी वीरगाथा हमेशा हमारे हृदयों में जीवित रहेंगी। उनके परिवार के प्रति हम गहरी संवेदना व्यक्त करते हैं और उन्हें यह विश्वास दिलाते हैं कि राष्ट्र सदैव अपने इस वीर सपूत को याद रखेगा।






