मानगो फ्लाईओवर का उद्देश्य यातायात को सुगम बनाना था, वही आज पायल टॉकीज़ छोर पर जाम, अव्यवस्था और दुर्घटनाओं का कारण बनता जा रहा है.
नीरज सिंह ने कहा कि यह अत्यंत चिंताजनक है कि फ्लाईओवर में केवल डाउन रैंप बनाकर यातायात का सारा दबाव नीचे की एक संकरी सड़क पर डाल दिया गया। यह डिज़ाइन किस तकनीकी सोच और किस वैज्ञानिक ट्रैफिक आकलन के आधार पर तैयार किया गया—यह आज भी बड़ा सवाल है।
उन्होंने पूछा कि क्या इस परियोजना से पहले भविष्य के ट्रैफिक लोड का कोई स्वतंत्र और वैज्ञानिक अध्ययन कराया गया था? क्या स्थानीय नागरिकों, दुकानदारों और परिवहन से जुड़े लोगों से कोई सार्वजनिक परामर्श लिया गया था? यदि लिया गया था, तो उसकी रिपोर्ट आज तक सार्वजनिक क्यों नहीं की गई?
नीरज सिंह ने कहा कि सुबह और शाम के समय पायल टॉकीज़ छोर पर लगने वाला लंबा जाम, तेज़ रफ्तार वाहनों की आमने-सामने की आवाजाही और पैदल चलने वालों—विशेषकर स्कूली बच्चों व बुज़ुर्गों—की सुरक्षा पर मंडराता खतरा, इस फ्लाईओवर की खामियों को उजागर करता है।
उन्होंने पूर्व मंत्री बन्ना गुप्ता पर सवाल उठाते हुए कहा कि जब वे इस परियोजना का श्रेय लेते हैं, तो उन्हें यह भी बताना चाहिए कि फ्लाईओवर के डिज़ाइन और यातायात प्रबंधन को लेकर कौन-कौन सी तकनीकी समीक्षाएं करवाई गईं। क्या जनता की सुविधा और सुरक्षा को प्राथमिकता दी गई—या केवल उद्घाटन तक ही सोच सीमित रही?
नीरज सिंह ने यह भी कहा कि यदि आज़ादबस्ती क्षेत्र के सीमित हितों को ध्यान में रखकर समग्र मानगो की यातायात व्यवस्था को नज़रअंदाज़ किया गया है, तो यह एक गंभीर नीतिगत चूक है।
अंत में उन्होंने मांग की कि मानगो फ्लाईओवर की तत्काल स्वतंत्र तकनीकी समीक्षा कराई जाए, ट्रैफिक मैनेजमेंट प्लान में आवश्यक संशोधन हों, और जनता के साथ पारदर्शी संवाद स्थापित किया जाए।






